25 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय का प्रस्ताव, 1 सितंबर से सरकारी स्कूलों में लागू होगी ऑनलाइन उपस्थिति
शिमला, 4 अगस्त। हिमाचल प्रदेश सरकार ने दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्ती व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत योग्य अभ्यर्थियों को एक वर्ष के अनुबंध पर नियुक्त किया जाएगा और उन्हें प्रतिमाह 25,000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
यह निर्णय सोमवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में शिक्षा निदेशालय में आयोजित समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में स्कूल शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा करते हुए शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि यह भर्ती समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत की जाएगी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लागू समान व्यवस्था से प्रेरणा लेते हुए हिमाचल में भी मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया अपनाने का प्रस्ताव है, ताकि आवश्यकता वाले क्षेत्रों में समय पर शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जा सके।
प्रस्तावित प्रणाली के अनुसार चयन 100 अंकों की मेरिट के आधार पर किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ परास्नातक, एमफिल, पीएचडी तथा शिक्षण अनुभव को भी निर्धारित अंक दिए जाएंगे। सरकार स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आयु सीमा में आवश्यक संशोधन की संभावना पर भी विचार कर रही है।
1 सितंबर से सभी सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों में 1 सितंबर 2026 से ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत शिक्षकों और कर्मचारियों की हाजिरी विद्या समीक्षा केंद्र के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दर्ज होगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान में जहां-जहां ऑफलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है, उसे चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। स्कूलों के निरीक्षण की प्रक्रिया भी इसी डिजिटल प्रणाली से संचालित होगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला उपनिदेशकों एवं संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि नई भर्ती व्यवस्था और डिजिटल उपस्थिति प्रणाली से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर होगी और विद्यालयों की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह बनेगी।













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