सोलन: टमाटर से बदलेगी ग्रामीण महिलाओं की तकदीर: दो प्रसंस्करण इकाइयां शुरू, 2,105 महिलाओं को मिलेगा लाभ

On: October 15, 2026 3:50 PM
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सोलन के ढेढघराट और सलोगड़ा में टमाटर प्रसंस्करण इकाइयों का शुभारंभ करते डॉ. धनीराम शांडिल
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ढेढघराट और सलोगड़ा में टमाटर प्यूरी इकाइयों का शुभारंभ, अब टमाटर से प्यूरी, कैचअप और जैम बनाकर बढ़ेगी कृषि उपज की कीमत; दोनों केंद्रों पर 78.50 लाख रुपये की परियोजनाएं

सोलन। टमाटर की खेती करने वाले किसानों और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी को मजबूत करने की दिशा में सोलन जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के ढेढघराट और सलोगड़ा में टमाटर प्रसंस्करण इकाइयां शुरू होने से स्थानीय कृषि उपज को नए उत्पादों में बदलने और बेहतर बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इन दोनों इकाइयों से कुल 2,105 महिलाओं को जोड़कर उनकी आजीविका को सशक्त बनाने का लक्ष्य है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने दोनों केंद्रों का शुभारंभ किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये इकाइयां किसानों के लिए लाभकारी साबित होंगी और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

टमाटर की फसल से तैयार होंगे कई उत्पाद

इन इकाइयों की खासियत यह है कि यहां टमाटर को केवल कच्ची कृषि उपज के रूप में बेचने के बजाय उससे मूल्यवर्धित खाद्य उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। टमाटर प्यूरी, टमाटर कैचअप, जैम और अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण के लिए आवश्यक मशीनें स्थापित की गई हैं।

कृषि उत्पादों की सफाई, छंटाई, धुलाई, कटाई, पिसाई, पकाने और पैकिंग की व्यवस्था भी की गई है। स्थानीय कृषि उपज की उपलब्धता के अनुसार अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार करने की संभावनाएं भी रहेंगी।

तैयार उत्पादों की बाजार की मांग के अनुरूप पैकेजिंग, लेबलिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि इन्हें बेहतर बाजार तक पहुंचाकर उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा सकें।

ढेढघराट में 255 महिलाओं को मिलेगा लाभ

ढेढघराट में स्थापित टमाटर प्रसंस्करण इकाई नया सवेरा मॉडल क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत संचालित होगी। इस केंद्र से ग्राम पंचायत मही, क्वारग और बीशा के 33 स्वयं सहायता समूहों की 255 महिलाएं जुड़ी हुई हैं।

इस इकाई में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए 13 मशीनें स्थापित की गई हैं। केंद्र की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार इस परियोजना की लागत 39 लाख 25 हजार रुपये है।

इस इकाई के माध्यम से स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलने के साथ महिलाओं के लिए सामूहिक उद्यम और स्वरोजगार की संभावनाएं विकसित होंगी।

सलोगड़ा की इकाई से 1,850 महिलाएं जुड़ीं

सलोगड़ा में नया सवेरा आदर्श संकुल स्तरीय संघ बसाल के अंतर्गत दूसरी टमाटर प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है। इस केंद्र से क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायतों के 200 स्वयं सहायता समूहों की 1,850 महिलाएं जुड़ी हुई हैं।

इन पंचायतों में मशीवर, जौणाजी, सेरी, शमरोड़, नौणी, ओच्छघाट, शामती, सपरून, आंजी, डांगरी, तोप की बेड़, देवठी, बसाल, धरोट, पड़ग और सलोगड़ा शामिल हैं।

इस केंद्र में भी कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए 13 मशीनें स्थापित की गई हैं। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की लागत भी 39 लाख 25 हजार रुपये है।

इस प्रकार दोनों केंद्रों में कुल 26 मशीनों की व्यवस्था की गई है और 233 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 2,105 महिलाओं को इन इकाइयों के माध्यम से आजीविका के अवसर उपलब्ध करवाने की पहल की गई है।

किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद

टमाटर जैसी नकदी फसल का उत्पादन होने के बावजूद किसानों के सामने उपज को सही समय पर बेचने और बेहतर कीमत हासिल करने की चुनौती रहती है। प्रसंस्करण इकाइयां इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकती हैं, क्योंकि इनके माध्यम से टमाटर को लंबे समय तक उपयोग में लाए जा सकने वाले विभिन्न उत्पादों में बदला जा सकेगा।

इससे स्थानीय कृषि उपज का बेहतर उपयोग करने, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए बाजार विकसित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

हालांकि, इन इकाइयों की वास्तविक सफलता नियमित उत्पादन, टमाटर की पर्याप्त उपलब्धता, उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार से जुड़ाव और बिक्री पर भी निर्भर करेगी।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

डॉ. धनीराम शांडिल ने कहा कि ये इकाइयां स्थायी आजीविका के केंद्र के रूप में विकसित हो सकती हैं। इनके माध्यम से स्थानीय महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलने के साथ परिवारों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि, बागवानी और दुग्ध उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए प्रयासरत है। सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, लोगों तक सुरक्षित कृषि उत्पाद पहुंचाने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में भी कदम उठा रही है।

उन्होंने प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा गाय और भैंस के दूध के समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि का भी उल्लेख किया।

ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्थापित हुईं इकाइयां

दोनों टमाटर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से संचालित हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत की गई है। इनका संचालन महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के तहत किया जा रहा है।

इन इकाइयों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कृषि आधारित उद्यम से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका के अवसर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

शुभारंभ अवसर पर ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण के उपाध्यक्ष कर्नल संजय शांडिल, पंचायत समिति कंडाघाट की अध्यक्ष इंद्रा चौहान, उपाध्यक्ष ज्ञान ठाकुर, ग्राम पंचायत मही की प्रधान रीना ठाकुर, ग्राम पंचायत पड़ग की प्रधान मीरा देवी, ग्राम पंचायत मनसार के प्रधान जय प्रकाश, ग्राम पंचायत सलोगड़ा के उपप्रधान मोहन लाल, उमा दत्त, प्रदेश कांग्रेस महासचिव रमेश ठाकुर, जिला परिषद सदस्य अमित ठाकुर, कांग्रेस नेता लक्ष्मी दत्त शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इसके अलावा उपमंडलाधिकारी कंडाघाट गोपाल शर्मा, उपमंडलाधिकारी सोलन नीरजा शर्मा, जिला विकास अधिकारी रमेश शर्मा, खंड चिकित्सा अधिकारी सायरी डॉ. अजय कुमार, खंड विकास अधिकारी ओ.पी. शर्मा, मंजुला कंवर, नया सवेरा संकुल स्तरीय संघ बसाल की प्रधान निशी, नवचेतना संकुल स्तरीय संघ कंडाघाट की प्रधान नीतू डोगरा, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और क्षेत्र के ग्रामीण भी मौजूद रहे।

अब इन इकाइयों के सामने स्थानीय टमाटर की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने और उन्हें बाजार में स्थापित करने की चुनौती होगी। यदि उत्पादन और विपणन की व्यवस्था प्रभावी रहती है, तो यह पहल सोलन की ग्रामीण महिलाओं और टमाटर उत्पादक किसानों के लिए आय के नए रास्ते खोल सकती है।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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