शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में अब जेबीटी शिक्षकों की तैनाती विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर की जाएगी। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के युक्तिकरण (Rationalization) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत जिन स्कूलों में छात्र संख्या के मुकाबले शिक्षक अधिक हैं, वहां से सरप्लस शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजा जाएगा, जहां शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
प्रदेश में वर्तमान में 3,209 सरकारी प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जो एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे स्कूल भी हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या काफी कम होने के बावजूद दो से तीन जेबीटी शिक्षक तैनात हैं। विभाग के सामने शिक्षकों के असमान वितरण की स्थिति को दूर करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कम छात्र संख्या वाले स्कूलों से हटेंगे अतिरिक्त शिक्षक
शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश के कुछ प्राथमिक विद्यालयों में महज आठ से दस विद्यार्थियों के लिए दो से तीन शिक्षक तैनात हैं। इसके विपरीत कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
इसी असंतुलन को दूर करने के लिए विभाग ने स्कूलवार विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात की समीक्षा शुरू की है। समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि प्रत्येक स्कूल में स्वीकृत पदों और छात्र संख्या के अनुपात में कितने शिक्षक आवश्यक हैं।
जरूरत वाले स्कूलों में भेजे जाएंगे सरप्लस JBT
नई व्यवस्था के तहत जिन प्राथमिक स्कूलों में निर्धारित मानकों से अधिक शिक्षक पाए जाएंगे, वहां से अतिरिक्त यानी सरप्लस जेबीटी शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।
इससे एक ओर जहां शिक्षकों की उपलब्धता का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से शिक्षक कमी का सामना कर रहे स्कूलों को राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के उन स्कूलों को इसका लाभ मिल सकता है, जहां विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
पहले जुटाया जाएगा पूरा रिकॉर्ड
शिक्षा विभाग ने युक्तिकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए स्कूलों से संबंधित पूरा रिकॉर्ड जुटाने के निर्देश दिए हैं। इसमें प्रत्येक विद्यालय की छात्र संख्या, वर्तमान शिक्षक संख्या और उपलब्ध पदों समेत अन्य आवश्यक जानकारी शामिल की जाएगी।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि विभागीय अधिकारियों को स्कूलों से संबंधित पूरा रिकॉर्ड एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद छात्र संख्या और आवश्यकता के आधार पर शिक्षकों का युक्तिकरण किया जाएगा।
3,209 स्कूलों पर विशेष ध्यान
प्रदेश में 3,209 प्राथमिक स्कूलों का एक शिक्षक के सहारे संचालित होना शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में विभाग का प्रयास है कि उपलब्ध जेबीटी शिक्षकों का तर्कसंगत तरीके से पुनर्वितरण किया जाए, ताकि किसी स्कूल में आवश्यकता से अधिक शिक्षक न रहें और शिक्षक की कमी वाले विद्यालयों को पर्याप्त स्टाफ मिल सके।
सरकार के इस कदम से प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक वितरण का असंतुलन कम होने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। हालांकि युक्तिकरण के बाद किन-किन स्कूलों से शिक्षकों को स्थानांतरित किया जाएगा, इसकी तस्वीर विभाग द्वारा स्कूलवार रिकॉर्ड की समीक्षा पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।













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