विभागीय जांच में आरोप सिद्ध, शिक्षा विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए जारी किए आदेश
शिमला। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने एक सरकारी शिक्षक के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देने के आदेश जारी किए हैं। विभागीय जांच में शिक्षक पर शराब के नशे में स्कूल पहुंचने, सरकारी दायित्वों की अनदेखी करने, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने तथा छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट करने के आरोप सिद्ध पाए गए। इसके बाद शिक्षा विभाग ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत कार्रवाई की।
जारी आदेशों के अनुसार मोहिंदर सिंह, जो पहले राजकीय माध्यमिक विद्यालय रांभो, जिला चंबा में टीजीटी (नॉन मेडिकल) के पद पर कार्यरत थे और बाद में राजकीय उच्च विद्यालय कंड, जिला कांगड़ा में तैनात थे, के खिलाफ 20 मार्च 2025 को विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी।
जांच में गंभीर आरोप साबित
शिक्षा विभाग के अनुसार शिक्षक पर कई बार शराब के नशे में विद्यालय आने, अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने तथा छात्रों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट करने के आरोप लगाए गए थे। विभागीय जांच के दौरान इन आरोपों की पुष्टि हुई।
शिक्षक ने आरोपों से किया था इनकार
शिक्षक ने अपने जवाब में सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वे लंबे समय से अग्नाशय और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने शिकायत को दुर्भावनापूर्ण बताया और यह भी आरोप लगाया कि प्रारंभिक जांच निष्पक्ष नहीं थी तथा उनके खिलाफ प्रस्तुत वीडियो से छेड़छाड़ की गई थी।
हालांकि विभाग ने उनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना और नियमित विभागीय जांच कराई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में आरोप सिद्ध पाए जाने के बाद शिक्षक को अंतिम पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया, लेकिन विभाग ने उनके तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
छात्रों के लिए आदर्श आचरण आवश्यक: शिक्षा विभाग
अपने आदेश में शिक्षा विभाग ने कहा कि एक सरकारी शिक्षक से अनुशासन, ईमानदारी और विद्यार्थियों के लिए आदर्श आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में नशे की हालत में विद्यालय पहुंचना और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करना गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है।
विभाग ने सभी तथ्यों, शिक्षक की सेवा अवधि और स्वास्थ्य संबंधी दलीलों पर विचार करने के बाद बर्खास्तगी या सेवा से हटाने के बजाय 31 जुलाई 2026 से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड लागू करने का निर्णय लिया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक को पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रचलित नियमों के अनुसार प्रदान किए जाएंगे।













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