नाहन। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के धौलाकुआं स्थित आईआईएम सिरमौर में बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (BMS) के 19 वर्षीय छात्र प्रभात शुक्ला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब कानूनी जांच के दायरे में आ गया है। मृतक के परिजनों की शिकायत पर पुलिस थाना माजरा में संस्थान के अधिकारियों और प्रशासन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
मूल रूप से जबलपुर, मध्य प्रदेश के रहने वाले प्रभात शुक्ला अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। परिजनों का आरोप है कि वर्ष 2024 में आईआईएम में दाखिले के समय प्रभात पूरी तरह स्वस्थ थे, लेकिन बाद में संस्थान में कथित बुलिंग और मानसिक प्रताड़ना के कारण उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हुई।
मृतक के चाचा श्याम शुक्ला और मां के अनुसार, घटना से करीब तीन दिन पहले भी प्रभात ने अपने हाथ की नस काटने की कोशिश की थी। परिजनों का आरोप है कि इस गंभीर घटना की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि उन्हें तत्काल सूचना मिलती तो वे संस्थान पहुंचकर बेटे को संभाल सकते थे।
दो-तीन दिन तक फोन नहीं उठाने पर पिता ने किया संपर्क
परिजनों के अनुसार, प्रभात द्वारा लगातार दो-तीन दिन तक फोन नहीं उठाने पर उनके पिता अनुपम शुक्ला ने जबलपुर से आईआईएम धौलाकुआं के हॉस्टल वार्डन से संपर्क किया। इसके बाद छात्र के कमरे की जांच की गई। आरोप है कि कमरे की खिड़की तोड़कर अंदर देखने पर प्रभात फर्श पर अचेत अवस्था में मिले, जबकि पंखे से चुन्नी लटकी हुई थी।
उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद पांवटा साहिब श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
संस्थान पर जानकारी छिपाने और निगरानी में लापरवाही के आरोप
मृतक के पिता की शिकायत में संस्थान प्रबंधन पर छात्र की पर्याप्त निगरानी नहीं रखने, घटना की जानकारी समय पर परिजनों को नहीं देने और कथित बुलिंग व मानसिक उत्पीड़न को रोकने में लापरवाही बरतने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मोबाइल और लैपटॉप फोरेंसिक जांच के लिए भेजे
सिरमौर के एसपी निश्चित सिंह नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने मृतक छात्र का लॉक मोबाइल फोन और लैपटॉप अपने कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
उन्होंने बताया कि मामला दर्ज होने के बाद संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों, हॉस्टल वार्डन और छात्र के साथियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों की शिकायत सहित सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की गहन जांच कर रही है।
पुलिस जांच से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है कि छात्र की मौत से पहले क्या परिस्थितियां बनी थीं और क्या संस्थान स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य कारण की भूमिका रही।












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