भाजपा का विधानसभा परिसर में प्रदर्शन, सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रतिशोध की राजनीति के आरोप
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी का गवाह बना। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक दल ने सदन से वॉकआउट किया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विधानसभा अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए सदन की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की मांग उठाई।
जयराम ठाकुर का कहना था कि मुख्यमंत्री ने विपक्ष के विधायकों पर राष्ट्रगान के अपमान का गंभीर आरोप लगाया था। भाजपा की ओर से जब इस संबंध में सदन की वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी गई तो उसे उपलब्ध नहीं करवाया गया। उन्होंने दावा किया कि यदि रिकॉर्डिंग सामने आती है तो मुख्यमंत्री का आरोप गलत साबित हो जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री के बयान को सही साबित करने के बजाय पूरी कार्यवाही का वीडियो सामने रखना चाहिए। उनके अनुसार, सदन में क्या हुआ, यह स्पष्ट करने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग ही सबसे विश्वसनीय आधार है।
राष्ट्रगीत के मुद्दे पर कांग्रेस पर हमला
राष्ट्रगीत को लेकर भी जयराम ठाकुर ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि देश की संसद में राष्ट्रगीत का गायन हुआ है और ऐसे मामलों में संविधान तथा संसद की व्यवस्था सर्वोच्च है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि देश संविधान के अनुसार चलेगा, न कि किसी राजनीतिक परिवार के निर्देशों के आधार पर।
‘पाँच अटैचियों’ के मुद्दे ने बढ़ाई सियासी गर्मी
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा विधायक दल ने परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कथित तौर पर चर्चा में आईं ‘पाँच अटैचियों’ का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की गई।
जयराम ठाकुर ने कहा कि अटैचियों को लेकर आरोप कांग्रेस के भीतर से ही सामने आए हैं, इसलिए सरकार को इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल आरोपों को खारिज करने या मुद्दे को दूसरी दिशा में ले जाने से सवाल खत्म नहीं होंगे।
हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या संबंधित पक्ष का पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है।
रोजगार और संस्थानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा
जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और प्रदेश हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि युवाओं के रोजगार और स्वरोजगार जैसे मुद्दों पर सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए थी, लेकिन राजनीतिक विवादों में सरकार का ध्यान ज्यादा दिखाई दे रहा है।
उन्होंने भाजपा नेताओं और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर भी सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया। साथ ही स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों को बंद किए जाने के फैसलों को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
भाजपा विधायक दल के प्रदर्शन और जयराम ठाकुर के इन आरोपों के बाद विधानसभा सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार ‘राष्ट्रगान विवाद’ और ‘पाँच अटैचियों’ से जुड़े विपक्ष के सवालों पर क्या जवाब देती है।













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