हिमाचल कांग्रेस में बगावत के सुर: कौल सिंह समेत कई दिग्गजों ने खोला मोर्चा, ‘सुक्खू सरकार’ पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप

On: April 17, 2026 9:26 AM
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शिमला के राजीव भवन में हिमाचल कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में प्रभारी रजनी पाटिल और अन्य नेता।
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शिमला | हिमालयन डॉन, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही अंतर्कलह अब खुलकर सड़कों और पार्टी मंचों पर आने लगी है। राजधानी शिमला के राजीव भवन में वीरवार को आयोजित प्रदेश कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की कमेटी की बैठक हंगामेदार रही। प्रभारी रजनी पाटिल की मौजूदगी में पूर्व मंत्रियों और विधायकों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार में संगठन और कार्यकर्ताओं की भारी अनदेखी हो रही है।

सत्ता के केंद्रीकरण पर बरसे दिग्गज

​बैठक में पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, पूर्व विधायक बंबर ठाकुर और सराज से पूर्व प्रत्याशी चेतराम ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि प्रदेश में शक्तियों का केंद्रीकरण हो गया है। नेताओं ने आरोप लगाया कि:

  • CMO का हस्तक्षेप: जिला परिषद प्रत्याशियों का चयन संगठन के बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से तय हो रहा है।
  • मंत्रियों की बेबसी: मंत्रियों की सिफारिशों पर भी काम नहीं हो रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति कमजोर हो रही है।
  • फंड का असमान वितरण: विकास कार्य कुछ सीमित विधानसभा क्षेत्रों तक ही सिमट कर रह गए हैं।
  • विपक्ष का दबदबा: नेताओं ने यहां तक कह दिया कि सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेसी कार्यकर्ता परेशान हैं, जबकि भाजपा नेताओं के काम आसानी से हो रहे हैं।

शिमला से दफ्तर शिफ्ट करने का कड़ा विरोध

​बैठक में शिमला के स्थानीय नेताओं ने राजधानी से सरकारी दफ्तरों को बाहर शिफ्ट करने के सरकार के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले से जनता में भारी नाराजगी है, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।

कौल सिंह ठाकुर की दोटूक: “मंत्रियों को मिले स्वतंत्र काम करने की छूट”

​वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने शिक्षा विभाग का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस पदाधिकारियों और उनके परिजनों के तबादले दूरदराज क्षेत्रों में किए जा रहे हैं।

​”मैंने शिक्षा मंत्री से बात की थी, उन्होंने आश्वासन भी दिया, लेकिन फाइल महीनों तक मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबित रही। मंत्रियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए। अगर कार्यकर्ता नाराज होगा, तो सरकार की छवि खराब होगी।” – कौल सिंह ठाकुर

संगठन की सुस्ती पर जिला अध्यक्षों का वार

​पार्टी की अंदरूनी बैठकों में जिला अध्यक्षों ने भी गुब्बार निकाला। उनका कहना है कि ब्लॉक कार्यकारिणी के गठन में हो रही देरी से जमीनी स्तर पर पार्टी पंगु हो गई है। बिना मजबूत टीम के आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों में उतरना मुश्किल होगा। नेताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो डेढ़ साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

हाईकमान की सख्त हिदायत

​नेताओं के तेवर देख प्रभारी रजनी पाटिल ने समन्वय बनाने की कोशिश की। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि संगठन और सरकार को मिलकर चलना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की छवि पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए और जल्द ही संगठनात्मक ढांचे को दुरुस्त कर लिया जाएगा।

​कांग्रेस के लिए आगामी पंचायत चुनाव ‘सेमीफाइनल’ की तरह हैं। लेकिन जिस तरह से पार्टी के वरिष्ठ नेता अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं, उसने सुक्खू सरकार की पेशानी पर बल ला दिए हैं। अब देखना यह है कि हाईकमान इस अंतर्कलह को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है।

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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