हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला | अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने शिमला के ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल (KNH) की गायनी ओपीडी को आईजीएमसी (IGMC) शिफ्ट करने के सरकार के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर समिति की कार्यकर्ता आज सुबह 11 बजे से अस्पताल परिसर में 24 घंटे के महापड़ाव (धरने) पर बैठ गई हैं। महिला समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार इस ‘महिला विरोधी’ फैसले को वापस नहीं लेती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
महिला समिति की पदाधिकारियों का कहना है कि केएनएच (KNH) प्रदेश का एकमात्र समर्पित मातृ एवं शिशु अस्पताल है। सरकार का तर्क है कि सुविधाओं के अभाव के कारण गायनी विभाग को आईजीएमसी और चम्याना शिफ्ट किया जा रहा है, लेकिन समिति का मानना है कि सरकार को सुविधाओं में सुधार करना चाहिए था न कि अस्पताल के अस्तित्व को ही खतरे में डालना चाहिए।
समिति ने धरने के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु उठाए:
- संक्रमण का खतरा: आईजीएमसी में अन्य बीमारियों के मरीज भी आते हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं और नवजातों में इंफेक्शन फैलने का डर रहेगा।
- सुविधाओं का अभाव: केएनएच में मरीजों को धूप और खुला वातावरण मिलता है, जो गायनी मरीजों के लिए अनिवार्य है, जबकि आईजीएमसी में भारी भीड़ के कारण इलाज मुश्किल हो जाएगा।
- एक छत के नीचे इलाज: महिलाओं की मांग है कि उन्हें मातृ एवं शिशु संबंधी सभी उपचार एक ही परिसर में मिलने चाहिए।
”13 अप्रैल को हमने केवल प्रदर्शन किया था, लेकिन सरकार की बेरुखी ने हमें धरने पर बैठने को मजबूर किया है। अगर सरकार अब भी नहीं जागी, तो 30 अप्रैल को आईजीएमसी में प्रदर्शन होगा और उसके बाद पूरे प्रदेश की महिलाओं को लामबंद कर सचिवालय का घेराव किया जाएगा।” — महिला समिति प्रवक्ता
30 अप्रैल को उग्र आंदोलन की चेतावनी
महिला समिति ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के हालिया बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अस्पताल को किश्तों में खत्म करने की साजिश रची जा रही है। आज के धरने में सोनिया शबरवाल, फ़लमा चौहान, रमा रावत, हिम्मी ठाकुर, रंजना जैरेट, सुनिधि, दिव्या शर्मा, शारदा शर्मा, पलक शांडिल, दीपा, डॉली, माला और सावित्री सहित अन्य महिलाओं ने भाग लिया।
यह धरना कल सुबह 11 बजे तक जारी रहेगा, जिसके बाद समिति आगामी रणनीति का बिगुल फूंकेगी। समिति ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक गायनी ओपीडी वापस केएनएच नहीं लाई जाती, जिला कमेटी इस लड़ाई को पीछे नहीं हटाएगी।
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