हिमाचल में अति निर्धन परिवारों की होगी दोहरी जांच, ₹75 हजार से ज्यादा आय वालों को नहीं मिलेगा लाभ

On: August 27, 2026 7:02 AM
हमें फॉलो करें:
मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना में अति निर्धन परिवारों के चयन के मानदंड
--विज्ञापन यहां--

Whatsapp Channel

Join Now

Telegram Group

Join Now

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ के तहत अति निर्धन परिवारों की पहचान और चयन के लिए मानदंड स्पष्ट कर दिए हैं। योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने लाभार्थियों के चयन की दो चरणों वाली प्रक्रिया तय की है। पहले समावेशन मानदंडों के आधार पर पात्र परिवारों का पूल तैयार किया जाएगा और इसके बाद बहिष्करण की चार कसौटियों पर अंतिम जांच होगी।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विधानसभा में विधायकों को योजना के तहत तय चयन प्रक्रिया और मानदंडों की जानकारी दी।

₹75 हजार से ज्यादा सालाना आय तो योजना से बाहर
सरकार के तय मानदंडों के अनुसार जिस परिवार की वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक होगी, उसे योजना के अंतिम लाभार्थी के रूप में शामिल नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा परिवार के पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि, परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता होने या किसी सदस्य के सरकारी, अर्धसरकारी अथवा निजी नौकरी में होने पर भी परिवार अंतिम सूची से बाहर हो जाएगा।
यानी योजना में चयन के लिए पहले यह देखा जाएगा कि परिवार प्रारंभिक पात्रता की श्रेणी में आता है या नहीं। इसके बाद यह जांचा जाएगा कि वह बहिष्करण की किसी शर्त में तो नहीं आता।

इन परिवारों को पहले चरण में मिलेगी प्राथमिकता
समावेशन प्रक्रिया में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दी गई है। प्रारंभिक पात्रता के लिए कई श्रेणियां तय की गई हैं।

27 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चों वाले परिवार पात्र परिवारों के प्रारंभिक पूल में शामिल किए जाएंगे। इसके साथ ही ऐसे परिवार भी इस दायरे में आएंगे, जिनमें केवल 59 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य हैं और 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य नहीं है।

महिला मुखिया वाले परिवारों को भी प्राथमिकता दी गई है, जहां 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य नहीं है। इसमें विधवा, अविवाहित, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएं शामिल हैं।

दिव्यांगता और गंभीर बीमारी वाले परिवार भी दायरे में
सरकार ने 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता वाले मुखिया के परिवारों को भी प्रारंभिक पात्रता पूल में शामिल किया है।

इसके अलावा जिन परिवारों के सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है, वे भी प्रारंभिक पात्रता हासिल कर सकेंगे।

गंभीर बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम कमाने वाले सदस्य वाले परिवारों को भी योजना के दायरे में रखा गया है। इसमें कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से प्रभावित परिवार शामिल हैं। दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण स्थायी रूप से बिस्तर पर पड़े कमाने वाले सदस्य वाले परिवार भी पात्रता पूल में शामिल किए जाएंगे।

पहले पात्रता, फिर अपात्रता की जांच
सरकार ने लाभार्थियों के चयन के लिए दोहरी कसौटी अपनाई है। इसका मतलब है कि किसी परिवार का प्रारंभिक पात्रता सूची में आ जाना ही योजना का लाभ मिलने की गारंटी नहीं होगी।

पहले परिवार को समावेशन मानदंडों के आधार पर पात्र पूल में शामिल किया जाएगा। इसके बाद चार बहिष्करण शर्तों के आधार पर अंतिम जांच होगी।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी परिवार के सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है, तो वह प्रारंभिक पात्रता सूची में आ सकता है। लेकिन जांच में यदि उसकी वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक पाई जाती है, तो उसे अंतिम सूची से बाहर कर दिया जाएगा।

वहीं यदि परिवार की वार्षिक आय 75 हजार रुपये या उससे कम है, जमीन एक हेक्टेयर या इससे कम है और परिवार में कोई आयकरदाता अथवा सरकारी, अर्धसरकारी या निजी नौकरी करने वाला सदस्य नहीं है, तो वह अंतिम रूप से योजना का पात्र माना जा सकेगा।

अपात्र को शामिल किया तो अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने अधिकारियों को चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विधानसभा में कहा कि पात्र परिवारों के चयन में लापरवाही बरतने पर खंड विकास अधिकारी (BDO) और उपमंडलाधिकारी (SDM) के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने बताया कि पात्र परिवारों की पहचान और सूची तैयार करने के लिए समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों के माध्यम से पात्रता की जांच की जा रही है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपात्र व्यक्ति को सूची में शामिल किया गया या किसी पात्र परिवार को जानबूझकर बाहर रखा गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
योजना का मकसद यही है कि सरकारी सहायता उन परिवारों तक पहुंचे, जो वास्तव में आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे अधिक जरूरतमंद हैं।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

व्हाट्सएप से जुड़ें

अभी जुड़ें

टेलीग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

इंस्टाग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें