सोलन। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला आयुर्वेदिक अस्पताल सोलन में 12 अगस्त को पैरा-सर्जिकल शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर में बवासीर, भगंदर और फिशर समेत विभिन्न रोगों से पीड़ित मरीजों को आयुर्वेद की विशेष पैरा-सर्जिकल तकनीकों के माध्यम से उपचार उपलब्ध करवाया जाएगा। कई माह से उपचार का इंतजार कर रहे मरीजों के लिए यह शिविर राहत लेकर आएगा।
जिला आयुर्वेदिक अस्पताल सोलन में हर दूसरे बुधवार तथा राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल नालागढ़ में हर चौथे बुधवार पैरा-सर्जिकल शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य मरीजों को विभिन्न बीमारियों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में विशेष आयुर्वेदिक उपचार उपलब्ध करवाना है।
बिना चीरा और टांके के उपचार की सुविधा
शिविर में क्षार कर्म, क्षार सूत्र, उत्तरबस्ति, अग्निकर्म, रक्तविस्रावन, सिरावेध और मर्म चिकित्सा जैसी आयुर्वेदिक पैरा-सर्जिकल विधियों का उपयोग किया जाता है। विशेष रूप से बवासीर, भगंदर और फिशर जैसी एनोरेक्टल समस्याओं से पीड़ित मरीजों को इन तकनीकों के माध्यम से उपचार दिया जाता है।
प्रॉक्टोलॉजिस्ट एवं एनोरेक्टल सर्जन डॉ. जितेश बंसल ने बताया कि 12 अगस्त को आयुर्वेदिक अस्पताल सोलन में आयोजित होने वाले शिविर में संबंधित रोगों से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिविर में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ आयुर्वेद की प्राचीन पैरा-सर्जिकल तकनीकों का समन्वय किया गया है।
उन्होंने बताया कि क्षारसूत्र चिकित्सा और अग्निकर्म जैसी विधियों के माध्यम से मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इन उपचार पद्धतियों की विशेषता यह है कि कई मामलों में पारंपरिक सर्जरी की तरह बड़े चीरे और टांकों की आवश्यकता नहीं होती तथा मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम देगी निशुल्क परामर्श
डॉ. जितेश बंसल ने कहा कि शिविर का उद्देश्य मरीजों को कम खर्च में, कम दर्द के साथ और जल्द रिकवरी वाला उपचार उपलब्ध करवाना है। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा मरीजों को निशुल्क परामर्श, जांच और उपचार संबंधी उचित मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।
“मरीजों को मिल रही राहत”
विभाग की ओर से आयोजित किए जा रहे पैरा-सर्जिकल शिविर से कई मरीजों को राहत मिली है। ऐसे में मरीजों के लिए विभाग की ओर से प्रतिमाह आयुर्वेदिक अस्पताल सोलन व नालागढ़ में शिविर लगाया जा रहा है। इसमें मरीजों का कम दर्द के साथ उपचार किया जा रहा है।
— डॉ. निशा वर्मा पंवर, जिला आयुष अधिकारी, सोलन













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