हिमालयन डॉन | सोलन | 1 अगस्त 2026
जिला सोलन के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से अपडेट करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन से कहा है कि वे यूडाइस (UDISE) पोर्टल पर विद्यार्थियों का डेटा शीघ्र अपडेट करें और जिन छात्रों की आधार कवरेज या अपार (APAAR) आईडी अभी तक नहीं बनी है, उनकी प्रक्रिया में तेजी लाएं।
शुरुआती चरण में ऐसे कम से कम 100 विद्यार्थियों की अपार आईडी तत्काल तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि कोई भी छात्र इस डिजिटल शिक्षा प्रणाली से वंचित न रहे।
क्या है APAAR ID और क्यों है जरूरी?
APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) एक 12 अंकों की यूनिक अकादमिक पहचान संख्या है, जो विद्यार्थियों की पूरी शैक्षणिक यात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखेगी। यह आईडी डिजी लॉकर से लिंक होगी, जिससे छात्र अपने रिपोर्ट कार्ड, मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज कभी भी और कहीं भी ऑनलाइन देख सकेंगे।
ड्रॉपआउट छात्रों पर भी रहेगी नजर
शिक्षा उपनिदेशक (गुणवत्ता शिक्षा) डॉ. राजेंद्र वर्मा ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों (ड्रॉपआउट) की समय पर पहचान करना और उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी बीच में पढ़ाई छोड़ देता है या देश के किसी अन्य राज्य अथवा स्कूल में प्रवेश लेता है, तो उसकी पूरी शैक्षणिक जानकारी APAAR ID के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हो जाएगी। इससे प्रवेश और स्थानांतरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी होगी।
स्कूलों में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
जिले में इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए स्कूलों में विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों और अभिभावकों को APAAR ID के लाभ, उपयोगिता और इसकी आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
इस यूनिक आईडी में छात्र का नाम, पता, माता-पिता का नाम, मोबाइल नंबर और अन्य आवश्यक पहचान संबंधी जानकारी दर्ज होगी, जो भविष्य में उसकी स्थायी शैक्षणिक पहचान का आधार बनेगी।
हिमालयन डॉन की नजर
नई शिक्षा व्यवस्था में APAAR ID विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान बनने जा रही है। इससे न केवल दस्तावेजों का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, बल्कि पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की समय पर पहचान कर उन्हें शिक्षा से दोबारा जोड़ने में भी मदद मिलेगी। यह पहल शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।













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