खबर जरा हटके: सिरमौर के इस गांव में शादी के नए नियम, शराब-दहेज पर बैन, उल्लंघन पर ₹50 हजार जुर्माना और बकरे का भोज

On: July 10, 2026 2:43 AM
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सिरमौर के शिलाई उपमंडल के धारवा गांव की ग्राम सभा में शादी-विवाह में शराब, दहेज और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने संबंधी नए सामाजिक नियमों की घोषणा करते ग्रामीण।
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शिलाई: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई उपमंडल के धारवा गांव ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। गांव की ग्राम सभा ने शादी-विवाह में बढ़ते दिखावे, फिजूलखर्ची और सामाजिक असमानता पर रोक लगाने के लिए कई सख्त लेकिन अनोखे नियम लागू किए हैं।

6 जुलाई को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीणों की सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि अब गांव में होने वाले विवाह समारोह सादगीपूर्ण होंगे। शादी में बीयर, शराब और अन्य सभी प्रकार के नशे पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। साथ ही दहेज लेने और देने पर भी पूर्ण रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

गहनों पर भी लगी सीमा
ग्राम सभा ने बढ़ती महंगाई और सोने-चांदी की कीमतों को देखते हुए महिलाओं के आभूषणों को भी सीमित करने का फैसला लिया है। अब विवाह समारोह में केवल नाक की तिल्ली, कान के झुमके और गले का मंगलसूत्र पहनने की अनुमति होगी।

बारात में सिर्फ 100 लोग और 15 वाहन
गांव के नए नियमों के अनुसार बारात में अधिकतम 100 बाराती और 15 वाहन ही शामिल हो सकेंगे। मामा स्वागत कार्यक्रम को भी सीमित किया गया है, जिसमें केवल शाकाहारी भोजन और परिवार के सीमित सदस्यों की भागीदारी होगी।

फास्ट फूड पर भी रोक
ग्राम सभा ने विवाह समारोह में फास्ट फूड पर प्रतिबंध लगाने का भी फैसला लिया है। इसके अलावा लकड़ी की दलाई, पटलोज और बच्चे के जन्म पर आयोजित होने वाले पारंपरिक कार्यक्रमों में भी शामिल होने वाले लोगों की संख्या तय कर दी गई है, ताकि अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रखा जा सके।

नियम तोड़ा तो लगेगा भारी जुर्माना
ग्राम सभा ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई परिवार इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, दंड स्वरूप पूरी पंचायत को एक बकरे का भोज भी देना होगा। साथ ही ऐसे परिवार के शादी-विवाह समारोह में गांव का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं होगा।

ग्रामीणों का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि समाज में सादगी, समानता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करना तथा बढ़ती सामाजिक प्रतिस्पर्धा और फिजूलखर्ची पर रोक लगाना है।

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