सोलन। जिले में अगले पांच दिनों के दौरान मौसम परिवर्तनशील रहने का पूर्वानुमान है। 28 अगस्त से 1 सितंबर तक अधिकांश क्षेत्रों में हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। जिले के लिए फिलहाल कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी स्थित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा की ओर से जारी कृषि मौसम परामर्श में किसानों और बागवानों को अधिक नमी के कारण फसलों में रोग बढ़ने की आशंका को देखते हुए खेतों और बागानों की विशेष निगरानी करने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार अधिक आर्द्रता और लंबे समय तक खेतों में नमी रहने से जड़ सड़न, झुलसा और पत्ती धब्बा जैसे फफूंद एवं जीवाणुजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
बारिश के बीच सेब तुड़ाई रोकने की सलाह
सेब उत्पादकों के लिए विशेष सलाह जारी की गई है। लगातार बादल और अधिक आर्द्रता की स्थिति में रसायनों का छिड़काव नहीं करने को कहा गया है। बागानों से खरपतवार और अनावश्यक झाड़ियों को हटाकर हवा का बेहतर संचार बनाए रखने तथा गिरे हुए और रोगग्रस्त फलों को नियमित रूप से एकत्र कर नष्ट करने की सलाह दी गई है।
कृषि मौसम परामर्श के अनुसार बारिश के दौरान और बारिश रुकने के तुरंत बाद सेब की तुड़ाई भी रोक देनी चाहिए, ताकि फलों में रोग और संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।
टमाटर और अन्य सब्जियों पर भी नजर जरूरी
टमाटर की फसल में पके फलों की समय पर तुड़ाई करने तथा बकआई रॉट और झुलसा रोग की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। रोग के लक्षण दिखाई देने पर संक्रमित पौधों या उनके हिस्सों को खेत से निकालकर मिट्टी में दबाने को कहा गया है। फलों को मिट्टी के सीधे संपर्क से बचाने की भी सलाह दी गई है।
खीरा और कद्दू वर्गीय फसलों में कीटों की निगरानी के साथ बेलों को सहारा देने तथा फल मक्खी की रोकथाम के लिए प्रति बीघा दो फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। मक्की की फसल में फॉल आर्मीवर्म की निगरानी के लिए प्रति एकड़ चार फेरोमोन ट्रैप लगाने को कहा गया है।
खेतों की निकासी व्यवस्था रखें दुरुस्त
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों और बागानों में जल निकासी नालियों की नियमित सफाई करने की सलाह दी है, ताकि बारिश का पानी जमा न हो। साफ मौसम के दौरान निराई-गुड़ाई और पौधों के आसपास मिट्टी चढ़ाने जैसे अंतर-सांस्कृतिक कार्य किए जा सकते हैं।
पशुपालकों को भी मानसून के दौरान पशुओं को सूखे, स्वच्छ और हवादार स्थान पर रखने तथा पर्याप्त स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है। साथ ही खुरपका-मुंहपका और ब्लैक क्वार्टर जैसी बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाने को कहा गया है।













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