नाहन। रेणुका बांध परियोजना से प्रभावित बेघर परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास के मुद्दे पर रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति ने हिमाचल प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के प्रबंध निदेशक से मुलाकात कर प्रभावित परिवारों की प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने बेघर परिवारों को मुआवजा किस्तों में देने की बजाय एकमुश्त जारी करने तथा पुनर्वास नीति में आवश्यक संशोधन करने की मांग उठाई।
बुधवार को नाहन में आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान पुनर्वास नीति के तहत हाउसलेस (बेघर) परिवारों को मुआवजा किस्तों में दिया जाता है। समिति का कहना है कि विस्थापित परिवारों को नया मकान बनाने, भूमि खरीदने और पुनर्वास की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक साथ बड़ी धनराशि की जरूरत होती है। ऐसे में किस्तों में मिलने वाला मुआवजा उनके लिए व्यावहारिक नहीं है।
संघर्ष समिति के प्रेस सचिव योगेश ठाकुर ने कहा कि प्रभावित परिवार वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने एचपीपीसीएल प्रबंधन के समक्ष स्पष्ट रूप से मांग रखी कि बेघर परिवारों को मुआवजे की राशि एकमुश्त उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे बिना आर्थिक कठिनाइयों के अपने नए घर का निर्माण कर सकें और सम्मानजनक तरीके से पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी कर सकें।
योगेश ठाकुर ने बताया कि एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक ने समिति की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि बेघर परिवारों को 75 प्रतिशत मुआवजा एकमुश्त देने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा पुनर्वास नीति से जुड़ी अन्य मांगों पर भी सहानुभूतिपूर्वक और गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया गया।
संघर्ष समिति ने उम्मीद जताई कि यदि प्रबंधन अपने आश्वासन के अनुरूप निर्णय लेता है तो इससे रेणुका बांध परियोजना से प्रभावित सैकड़ों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी और लंबे समय से लंबित पुनर्वास प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।













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