Apple Growers Alert: बारिश के बीच सेब के बगीचों में बढ़ा इन खतरनाक रोगों का खतरा, नौणी यूनिवर्सिटी ने जारी की एडवाइजरी

On: July 9, 2026 7:38 PM
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बारिश के दौरान सेब के बगीचों में रोग प्रबंधन को लेकर नौणी विश्वविद्यालय की एडवाइजरी
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नौणी। लगातार हो रही बारिश के बीच हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की गई है। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पादप रोग विज्ञान विभाग ने सेब के बगीचों में तेजी से फैलने वाले रोगों के प्रभावी प्रबंधन को लेकर विस्तृत एडवाइजरी जारी करते हुए किसानों से सतर्क रहने और समय पर फफूंदनाशकों का प्रयोग करने की अपील की है।

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, बागवानी विभाग के अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों की मासिक ऑनलाइन बैठक में मौसम की वर्तमान परिस्थितियों की समीक्षा के बाद यह परामर्श जारी किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बारिश के कारण बढ़ी नमी और आर्द्रता से पत्ती झुलसा, पत्ती धब्बा, मार्सोनिना लीफ ब्लॉच, व्हाइट रूट रॉट और कॉलर रॉट जैसे रोग तेजी से फैल सकते हैं।

जिन बगीचों में पहले रह चुका है रोग, वहां रखें विशेष निगरानी
वैज्ञानिकों ने कहा है कि जिन बगीचों में पिछले वर्ष इन रोगों का प्रकोप देखा गया था, वहां किसान विश्वविद्यालय और बागवानी विभाग द्वारा अनुशंसित स्प्रे शेड्यूल के अनुसार फफूंदनाशकों का नियमित छिड़काव करें। साथ ही बगीचों की लगातार निगरानी भी जरूरी है ताकि शुरुआती अवस्था में ही रोगों पर नियंत्रण पाया जा सके।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

  • बगीचों के अंदर और आसपास उगने वाले खरपतवारों को नियमित रूप से हटाएं।
  • अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा, पत्ती झुलसा और मार्सोनिना लीफ ब्लॉच के बचाव के लिए आवश्यकता अनुसार मेटीराम का सुरक्षात्मक छिड़काव करें।
  • अधिक प्रकोप वाले क्षेत्रों में विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित फफूंदनाशकों का बारी-बारी से प्रयोग करें।
  • व्हाइट रूट रॉट के नियंत्रण के लिए वर्षा ऋतु में पेड़ों के चारों ओर कार्बेन्डाजिम घोल से 3–4 बार ड्रेंचिंग करें।
  • कॉलर रॉट से बचाव के लिए तने से लगभग 30 सेंटीमीटर दूरी पर पूरे वृक्ष बेसिन में मैनकोजेब घोल से ड्रेंचिंग करें।
  • सिल्वर लीफ कैंकर और अन्य कैंकर रोगों के नियंत्रण के लिए फल तुड़ाई के 24 घंटे के भीतर क्यूप्रोफिक्स डिस्प्रेस का छिड़काव करें।

रसायनों को मिलाकर छिड़काव न करें
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अनुशंसित फफूंदनाशकों के साथ किसी भी कीटनाशी, सूक्ष्म पोषक तत्व, वृद्धि नियामक या हार्मोन को मिलाकर छिड़काव न करें। ऐसा करने से पौधों पर विषाक्त प्रभाव, फलों पर रसेटिंग और अन्य गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यदि इनका प्रयोग आवश्यक हो तो अलग-अलग समय पर ही करें।

समस्या होने पर यहां करें संपर्क
यदि बगीचों में किसी भी प्रकार के रोग के लक्षण दिखाई दें या तकनीकी सलाह की आवश्यकता हो तो किसान रोगग्रस्त पौधों की तस्वीरों के साथ अपनी समस्या hodmpp@uhf.ac.in पर भेज सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान समय पर रोग प्रबंधन अपनाकर सेब की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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