नौणी विश्वविद्यालय और भारत मौसम विज्ञान विभाग की एडवाइजरी जारी, हल्की से मध्यम बारिश के बीच सेब, टमाटर, शिमला मिर्च और पशुपालकों के लिए अहम निर्देश।
सोलन। यदि आप सेब या सब्जी की खेती कर रहे हैं तो अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी और भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ताजा कृषि मौसम परामर्श के अनुसार 31 जुलाई से 4 अगस्त तक जिले में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान किसानों को फसलों में अनावश्यक स्प्रे और सिंचाई से बचने की सलाह दी गई है।
पूर्वानुमान के अनुसार अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। हवा की गति सामान्य रहेगी और वातावरण में नमी 66 से 90 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। फिलहाल जिले के लिए किसी प्रकार की मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
सेब उत्पादकों के लिए सबसे अहम सलाह
विशेषज्ञों ने कहा है कि अधिक आर्द्रता और लगातार बादल रहने के कारण सेब में स्कैब और अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट रोग का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मौसम में किसानों को किसी भी प्रकार का स्प्रे नहीं करने की सलाह दी गई है। साथ ही बागों में खरपतवार हटाकर वायु संचार बेहतर बनाए रखने को कहा गया है। जल्दी पकने वाली किस्मों की तुड़ाई करने वाले किसानों को बारिश के दौरान या तुरंत बाद तुड़ाई नहीं करने की सलाह भी दी गई है। तुड़ाई के बाद फलों को छायादार और हवादार स्थान पर रखने से गुणवत्ता बनी रहती है।
टमाटर, खीरा और शिमला मिर्च किसानों के लिए भी अलर्ट
एडवाइजरी में टमाटर उत्पादकों को बकआई रॉट और झुलसा रोग पर नजर रखने, संक्रमित पौधों को तुरंत हटाने तथा आवश्यकता होने पर डाइथेन एम-45 का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। खीरा उत्पादकों को बेलों को सहारा देने और खेतों में जल निकासी सुनिश्चित करने को कहा गया है। वहीं शिमला मिर्च में सर्कोस्पोरा लीफ स्पॉट की निगरानी और संक्रमित पत्तियों को हटाने की सलाह दी गई है।
पशुपालकों के लिए भी जरूरी सूचना
मानसून के दौरान पशुओं में खुरपका-मुंहपका (FMD) और ब्लैक क्वार्टर (BQ) जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है। पशुपालकों को समय रहते अपने पशुओं का टीकाकरण कराने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए सामान्य सलाह
विशेषज्ञों ने किसानों से खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने, फिलहाल सिंचाई रोकने, खरपतवार हटाने, संक्रमित पौधों को नष्ट करने और बारिश के दौरान नदी-नालों से दूर रहने की अपील की है।









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