शिमला (हिमालयन डॉन) | मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने में जुटी है। सरकार का विशेष फोकस अब डेयरी सेक्टर पर है, जिसे ग्रामीण परिवारों के लिए एक लाभप्रद और भरोसेमंद आय का जरिया बनाया जा रहा है। इसी दिशा में प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को अब प्रतिमाह औसतन 34.18 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ दिए जा रहे हैं, जो प्रदेश के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।
दूध खरीद में ऐतिहासिक उछाल
सरकार की प्रोत्साहन नीतियों का असर जमीन पर दिखने लगा है। जहाँ वर्ष 2024-25 में दूध की औसत खरीद 1.57 लाख लीटर प्रतिदिन थी, वहीं अब हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (मिल्कफेड) द्वारा प्रतिदिन लगभग 2.70 लाख लीटर दूध खरीदा जा रहा है।
किसानों की आय में रिकॉर्ड वृद्धि
राज्य सरकार ने दूध के खरीद मूल्यों में ऐतिहासिक वृद्धि कर किसानों को सीधा लाभ पहुँचाया है। वर्ष 2026-27 के बजट प्रावधानों के अनुसार:
- गाय का दूध: 61 रुपये प्रति लीटर
- भैंस का दूध: 71 रुपये प्रति लीटर
”किसानों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। गांवों, महिलाओं और युवाओं को केंद्र में रखकर ही हम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर सकते हैं।” — ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
मजबूत होता डेयरी नेटवर्क (एक नज़र में)
| विवरण | पहले | अब (वर्तमान) |
|---|---|---|
| ग्राम दुग्ध समितियां | 583 | 758 |
| सदस्यों की संख्या | 27,498 | 39,790 |
| प्रसंस्करण संयंत्र | 11 (1.80 लाख लीटर क्षमता) | ढगवार |
बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण
- ढगवार में अत्याधुनिक प्लांट: कांगड़ा के ढगवार में एक नया मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता को भविष्य में 3 लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकेगा।
- नया मिल्क यूनियन: राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ समझौते के तहत कांगड़ा में नया मिल्क यूनियन बनेगा, जिससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा के किसान लाभान्वित होंगे।
- तकनीकी पारदर्शिता: दूध संग्रहण में पारदर्शिता के लिए 222 स्वचालित इकाइयां और 32 डेटा प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की गई हैं।
कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण
पिछले तीन वर्षों में 2,000 से अधिक किसानों को आधुनिक डेयरी तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा, रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों और दुग्ध उत्पादक समूहों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। मिल्कफेड अब घर-घर जाकर दूध का संग्रहण कर रहा है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों के किसानों को बाजार की तलाश में भटकना नहीं पड़ रहा है।
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