विशेष रिपोर्ट: शिक्षा के क्षेत्र में ‘हिमालयी क्रांति’ – स्कूल क्लस्टर प्रणाली से बदलेगी हिमाचल की तस्वीर

On: January 4, 2026 3:54 PM
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शिक्षा के क्षेत्र में 'हिमालयी क्रांति' – स्कूल क्लस्टर प्रणाली से बदलेगी हिमाचल की तस्वीर
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शिमला | हिमालयन डॉन ब्यूरो

हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। प्रदेश सरकार की ‘स्कूल क्लस्टर प्रणाली’ (School Cluster System) महज़ एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक ऐतिहासिक और नवोन्मेषी पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस मॉडल को औपचारिक रूप से लागू कर, दशकों से चली आ रही ‘एकल विद्यालयों’ की समस्या पर कड़ा प्रहार किया है।

क्या है हब-एंड-स्पोक मॉडल?

इस प्रणाली के तहत प्रदेश भर में 1,968 स्कूल क्लस्टर बनाए गए हैं। इस संरचना में प्रत्येक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला को ‘प्रमुख विद्यालय’ (Hub School) का दर्जा दिया गया है। इसके अधीन 7 से 8 प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च विद्यालयों को रखा गया है।

इस मॉडल की मुख्य विशेषताएं:

  • प्रशासनिक नियंत्रण: क्लस्टर के सभी स्कूलों की जिम्मेदारी अब संबंधित प्रमुख विद्यालय के प्रधानाचार्य की होगी।
  • संसाधनों का साझा उपयोग: छोटे स्कूलों के विद्यार्थी भी अब हब स्कूलों की आधुनिक आईसीटी प्रयोगशालाओं, विज्ञान लैब, समृद्ध पुस्तकालयों और खेल परिसरों का लाभ उठा सकेंगे।
  • समान शिक्षा: भौगोलिक बाधाओं को दूर कर हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना।

पिछली गलतियों का सुधार: वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पुनर्गठन

मुख्यमंत्री सुक्खू ने पिछली सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना किसी योजना के केवल राजनीतिक लाभ के लिए संस्थान खोलने से राज्य की अर्थव्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुई थीं। कई स्कूलों में छात्रों की संख्या शून्य या नगण्य थी, फिर भी वहां शिक्षक तैनात थे।

सरकार ने कड़े फैसले लेते हुए 31 दिसंबर, 2025 तक:

  • 770 शून्य नामांकन वाले स्कूलों को बंद किया।
  • 532 कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का नजदीकी विद्यालयों में विलय किया।
  • 42 उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं का स्तर घटाया या उन्हें बंद किया गया।

इस कदम का उद्देश्य ‘संस्थानों की संख्या’ के बजाय ‘शिक्षा की दक्षता’ पर ध्यान केंद्रित करना है। इससे शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात (PTR) में सुधार आया है और शहरी क्षेत्रों से अतिरिक्त शिक्षकों को दूरदराज के क्षेत्रों में भेजकर रिक्त पदों को भरा जा रहा है।

गारंटी से लेकर ग्लोबल एक्सपोजर तक

हिमाचल सरकार ने न केवल ढांचागत सुधार किए, बल्कि पाठ्यक्रम में भी बड़े बदलाव किए हैं:

  1. पहली कक्षा से अंग्रेजी: चुनावी वादे के अनुसार सरकारी स्कूलों में कक्षा-1 से अंग्रेजी माध्यम शुरू कर दिया गया है।
  2. राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल: हर विधानसभा क्षेत्र में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस डे-बोर्डिंग स्कूलों का निर्माण।
  3. अंतरराष्ट्रीय एक्स्पोजर: शिक्षकों और मेधावी छात्रों को वैश्विक शिक्षा प्रणालियों को समझने के लिए विदेश दौरों पर भेजा जा रहा है।

नतीजे बोल रहे हैं: 21वें से 5वें स्थान पर हिमाचल

इस वैज्ञानिक पुनर्गठन और आधुनिक पहल का असर आंकड़ों में दिखने लगा है। नेशनल अचीवमेंट सर्वे (NAS) में हिमाचल प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। जून 2025 तक राज्य अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए 21वें स्थान से सीधे 5वें स्थान पर पहुंच गया है।

स्कूल क्लस्टर प्रणाली हिमाचल के भविष्य की एक मजबूत नींव रख रही है। यह पहल न केवल सरकारी और निजी स्कूलों के बीच के अंतर को कम कर रही है, बल्कि राज्य के अंतिम छोर पर बैठे बच्चे को भी आधुनिक भारत की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है। सुक्खू सरकार का यह ‘हिमालयी मॉडल’ आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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