लॉगइन आईडी के दुरुपयोग से जुड़ा मामला, कॉल डिटेल और ओटीपी प्रक्रिया की भी जांच
सोलन। पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) सोलन में सामने आए फर्जीवाड़े के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती जांच में जिस क्लर्क की लॉगइन आईडी से कथित गड़बड़ी सामने आई थी, उसके अलावा अब विभाग के अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। प्रशासनिक स्तर पर की जा रही जांच के साथ-साथ पुलिस ने भी मामले में पूछताछ तेज कर दी है।
एसडीएम के नोटिस पर क्लर्क ने दिया जवाब
आरएलए सोलन में सामने आए इस प्रकरण को लेकर संबंधित क्लर्क से एसडीएम कार्यालय की ओर से जवाब मांगा गया था। क्लर्क ने अपने लिखित जवाब में बताया है कि उसने 24 नवंबर 2025 को ही लाइसेंस शाखा में कार्यभार संभाला था। इसके साथ ही उसे हेड क्लर्क के रूप में नियुक्त किया गया था।
क्लर्क के अनुसार, उसे 6 दिसंबर 2025 को पहले से कार्यरत एक अन्य कर्मचारी द्वारा विधिवत रूप से चार्ज सौंपा गया था। उसका कहना है कि जिस अवधि में फर्जीवाड़ा होने की बात सामने आई है, उस दौरान शाखा में पहले से मौजूद क्लर्क की आईडी भी सक्रिय थी।
फर्जी आईडी से हुआ लेनदेन, फिर भी संदेह बरकरार
हालांकि, जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कथित फर्जीवाड़ा उसी पुराने क्लर्क की फर्जी आईडी के माध्यम से किया गया। इसके बावजूद, अब वर्तमान में तैनात क्लर्क भी जांच के दायरे में आ गया है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि लॉगइन प्रक्रिया में लापरवाही हुई या किसी स्तर पर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग किया गया।
पुलिस ने शुरू की गहन पूछताछ
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भी समानांतर जांच शुरू कर दी है। संबंधित क्लर्क से पूछताछ की जा चुकी है, वहीं अब आरएलए कार्यालय के अन्य स्टाफ सदस्यों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस ने जांच के तहत संबंधित क्लर्क की 25, 28 और 29 नवंबर, साथ ही 5 और 6 दिसंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी निकलवाई है। इन कॉल डिटेल्स के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस दौरान क्लर्क ने किन-किन लोगों से संपर्क किया और बातचीत का स्वरूप क्या था।
ओटीपी सिस्टम पर उठे सवाल
एसडीएम की ओर से पुलिस को सौंपी गई शिकायत में एक अहम बिंदु भी सामने आया है। शिकायत के अनुसार, आरएलए विभाग के सिस्टम में जब भी किसी लॉगइन आईडी से प्रवेश किया जाता है, तो संबंधित क्लर्क के मोबाइल पर ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आता है। ओटीपी दर्ज करने के बाद ही सिस्टम में लॉगइन संभव होता है।
ऐसे में अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि बिना संबंधित क्लर्क के ओटीपी दिए लॉगइन कैसे किया गया? क्या ओटीपी किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचा या फिर तकनीकी स्तर पर कोई चूक हुई—इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
पुलिस और प्रशासन की संयुक्त जांच जारी
आरएलए सोलन में हुए इस फर्जीवाड़े को लेकर प्रशासन और पुलिस दोनों ही सतर्क नजर आ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। फिलहाल किसी भी कर्मचारी को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी।
एसपी सोलन का बयान
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपी सोलन गौरव सिंह ने कहा कि शिकायत में दिए गए तथ्यों के आधार पर जांच जारी है। उन्होंने बताया कि एसडीएम कार्यालय की ओर से जो भी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं, उन्हें जांच में शामिल किया गया है। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर निष्पक्ष जांच कर रही है।
आरएलए सोलन में सामने आया यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और लॉगइन सिस्टम की विश्वसनीयता को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह फर्जीवाड़ा व्यक्तिगत स्तर पर हुआ या इसके पीछे कोई संगठित लापरवाही अथवा साजिश थी।
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