सेब की फसल को रोगों से बचाने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 4.26 करोड़ रुपये की दवाएं खरीदी जाएंगी

On: July 23, 2026 12:24 PM
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हिमाचल में सेब की फसल को रोगों से बचाने के लिए 4.26 करोड़ रुपये की दवाएं
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल को स्कैब, अल्टरनेरिया और अन्य फफूंदजनित रोगों से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने बागवानों के लिए राहत का ऐलान किया है। मानसून के दौरान बढ़ती नमी के कारण सेब के बागानों में रोगों का खतरा बढ़ने के बीच बागवानी विभाग ने दवाओं की खरीद और आपूर्ति के लिए 4 करोड़ 26 लाख 76 हजार 140 रुपये की राशि जारी की है।

इस बजट से प्रदेश के विभिन्न सेब उत्पादक क्षेत्रों में करीब 17,300 पैक फफूंदनाशक और अन्य आवश्यक कृषि दवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। विभाग का उद्देश्य बागवानों को सही समय पर रोग नियंत्रण के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध करवाना है, जिससे सेब की फसल को नुकसान से बचाया जा सके और फल की गुणवत्ता भी बनी रहे।

जिला स्तर पर तय होगा दवाओं का वितरण
बागवानी विभाग ने दवाओं के वितरण के लिए जिला स्तर पर योजना तैयार की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सेब उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण शिमला जिले को सबसे अधिक 12,558 पैक दवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। वहीं किन्नौर को 1,672, राजगढ़ को 1,262, कुल्लू को 608, आनी को 576, चंबा को 408 और मंडी को 216 पैक आवंटित किए गए हैं।

विभाग के अनुसार, इन दवाओं का इस्तेमाल बागवानों को उपलब्ध करवाई जाने वाली वैज्ञानिक सलाह और क्षेत्र में रोग की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

मानसून में बढ़ जाता है रोगों का खतरा
बारिश और वातावरण में अधिक नमी से सेब के पौधों में फफूंदजनित रोग तेजी से फैलने की आशंका रहती है। स्कैब और अल्टरनेरिया जैसे रोगों का समय पर नियंत्रण नहीं होने पर इसका असर उत्पादन के साथ-साथ सेब की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। ऐसे में विभाग ने बागवानों को समय रहते आवश्यक दवाएं उपलब्ध करवाने की तैयारी की है।

बागवानी विभाग ने सेब उत्पादकों से अपील की है कि वे किसी भी दवा का छिड़काव मनमाने तरीके से न करें, बल्कि कृषि वैज्ञानिकों, बागवानी विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों की सलाह के अनुसार ही दवाओं का प्रयोग करें। सही दवा का सही समय पर इस्तेमाल करने से रोगों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के सेब उत्पादकों को मानसून के दौरान फसल बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां इस समय रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है, वहां दवाओं की उपलब्धता बागवानों के लिए काफी राहत देने वाली साबित हो सकती है।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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