IMD कृषि-मौसम सेवा ने जारी की सलाह; किसानों को रबी फसलों की बुवाई और बागवानों को 15 अक्टूबर से पहले मिट्टी की जांच कराने की सलाह
सोलन, 1 अक्टूबर। सोलन जिले में अगले पांच दिनों के दौरान मौसम शुष्क रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) तथा डॉ. वाई.एस. परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा की ओर से 1 अक्टूबर को जारी मौसम आधारित कृषि परामर्श के अनुसार 2 से 6 अक्टूबर तक जिले में बारिश की संभावना नहीं है।
पूर्वानुमान के मुताबिक इस अवधि में अधिकतम तापमान 24 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। हवा की गति करीब 2.9 से 4.6 किलोमीटर प्रति घंटा रहने तथा सापेक्षिक आर्द्रता 40 से 74 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। इस अवधि के लिए जिले में कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
किसानों के लिए रबी बुवाई का समय
मौसम साफ रहने को देखते हुए किसानों को रबी मौसम की फसलों की बुवाई की योजना बनाने की सलाह दी गई है। विभाग ने बुवाई से पहले मिट्टी की जांच करवाने पर भी जोर दिया है। साथ ही संक्रमित फलों और टहनियों को हटाकर नष्ट करने तथा साफ मौसम में हाथ से निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाने जैसे कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।
मक्के की फसल काट चुके किसान ध्यान दें
मक्के की फसल काट चुके किसानों को भुट्टों/उपज को सूखे, हवादार और सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। कटी हुई फसल अथवा उपज को खुले खेत में नहीं छोड़ने को कहा गया है।
सेब बागवानों के लिए खास सलाह
सोलन के सेब उत्पादकों के लिए मौसम सलाह में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। बागवानों को 15 अक्टूबर से पहले मिट्टी की जांच करवाने की सलाह दी गई है। गिरे हुए और रोगग्रस्त फलों को एकत्र कर बगीचे से बाहर निकालकर उचित तरीके से नष्ट करने को कहा गया है।
इसके अलावा मौसम साफ और शुष्क रहने पर अक्टूबर के पहले पखवाड़े में पेड़ों के तनों पर 2 से 3 फीट की ऊंचाई तक सफेदी करने की सलाह दी गई है। इसके लिए 100 लीटर पानी में 30 किलोग्राम चूना, 500 ग्राम कॉपर सल्फेट (नीला थोथा) और 500 मिलीलीटर अलसी के प्रयोग की सलाह दी गई है।
मटर, पालक, गोभी और लहसुन की खेती को लेकर भी सलाह
पालक: साफ और शुष्क मौसम में बुवाई करने की सलाह दी गई है। बीज दर 25–30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बताई गई है।
मटर: अगेती किस्मों अर्ली स्मॉल आर्कल और वीएल-1 की बुवाई 30×7.5 सेंटीमीटर की दूरी पर करने की सलाह दी गई है।
पत्तागोभी व फूलगोभी: 20–25 दिन पुरानी पौध की रोपाई करने की सलाह दी गई है। पत्तागोभी के लिए 45×45 सेंटीमीटर और फूलगोभी के लिए 30×20 सेंटीमीटर की दूरी रखने को कहा गया है।
लहसुन: बुवाई से पहले खेत की 2–3 बार जुताई कर अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद मिलाने की सलाह दी गई है। खाद की मात्रा 8 क्विंटल प्रति बीघा और 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। लहसुन की बुवाई के लिए बीज दर 40–50 किलोग्राम प्रति बीघा तथा दूरी 20×10 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी गई है।
पशुपालक भी रखें साफ-सफाई का ध्यान
पशुओं के चारे और बिछावन सामग्री को सूखा एवं स्वच्छ रखने तथा पशुशाला में साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी गई है। संक्रामक रोगों से बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार समय पर टीकाकरण कराने को भी कहा गया है।
पौधों के आसपास जैविक मल्च का इस्तेमाल करें
किसानों को मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवार नियंत्रित करने और सतही जल बहाव कम करने के लिए पौधों के आसपास सूखी पत्तियों जैसे जैविक मल्च का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। प्राकृतिक खेती करने वाले किसान साफ मौसम में अग्निअस्त्र, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और दशपर्णी अर्क के प्रयोग से संबंधित सलाह का पालन कर सकते हैं।









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