सोलन, 24 जुलाई। सोलन जिले में आने वाले दिनों में मौसम परिवर्तनशील रहने की संभावना है। डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी स्थित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा की ओर से जारी मौसम आधारित कृषि परामर्श के अनुसार 24 से 28 जुलाई के दौरान जिले के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, 27 जुलाई को भारी बारिश और 28 जुलाई को भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 25 से 29 जुलाई के बीच अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। इस दौरान सापेक्षिक आर्द्रता 66 से 92 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
खेतों में जलभराव और फसलों में रोग का बढ़ सकता है खतरा
कृषि मौसम सलाह में किसानों को लगातार बारिश के कारण खेतों में जलभराव, मिट्टी के कटाव और खड़ी फसलों के गिरने के संभावित खतरे को देखते हुए उचित जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। अधिक नमी और लंबे समय तक खेतों में गीलापन रहने से जड़ गलन, झुलसा और पत्ती धब्बा जैसे फफूंद एवं जीवाणु जनित रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों को खेतों की मेड़ों और आसपास की खरपतवार व झाड़ियों को हटाकर फसलों में बेहतर वायु संचार बनाए रखने तथा रोगग्रस्त पौधों या उनके प्रभावित हिस्सों को खेत से बाहर निकालकर नष्ट करने की सलाह दी गई है।
बारिश के दौरान सिंचाई रोकने की सलाह
किसानों को सभी फसलों में फिलहाल सिंचाई कार्य स्थगित रखने, बारिश के पानी को एकत्रित करने और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। खेतों में पानी जमा न हो, इसके लिए जल निकासी नालियां तैयार रखने और नियमित रूप से खरपतवार हटाने को कहा गया है। कीट-ग्रसित फलों और प्रभावित टहनियों की नियमित रूप से हाथ से तुड़ाई कर उनका सुरक्षित निपटान करने की भी सलाह दी गई है।
सेब उत्पादक किसान छिड़काव से करें परहेज
सेब की फसल इस समय फल विकास अवस्था में है। बढ़ी हुई 75 से 95 प्रतिशत तक सापेक्षिक आर्द्रता को देखते हुए किसानों को सेब के बागों में स्कैब और अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा रोग की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। लगातार बादल छाए रहने और अधिक नमी की स्थिति में किसी भी प्रकार का छिड़काव नहीं करने तथा बागों से खरपतवार और झाड़ियों को हटाकर वायु संचार बेहतर बनाए रखने को कहा गया है।
सब्जी उत्पादकों के लिए भी जारी की गई सलाह
खीरे की फसल में बेलों को उचित सहारा देने और जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। फलों को सीधे मिट्टी के संपर्क में आने से बचाने को कहा गया है।
टमाटर उत्पादकों को पके फलों की समय पर तुड़ाई करने, पौधों की निचली पत्तियों को भूमि की सतह से 10 से 15 सेंटीमीटर तक हटाने और खेतों में जल निकासी बनाए रखने की सलाह दी गई है। साथ ही बकआई रॉट और झुलसा रोग की निगरानी करने तथा संक्रमित पौधों या उनके हिस्सों को तुरंत खेत से निकालकर नष्ट करने को कहा गया है।
शिमला मिर्च में परिपक्व फलों की समय पर तुड़ाई के साथ सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा रोग पर नजर रखने और संक्रमित पत्तियों को हटाकर नष्ट करने की सलाह दी गई है। अरबी की फसल में भी भारी बारिश के दौरान उचित जल निकासी बनाए रखने तथा झुलसा और कंद गलन रोग की निगरानी करने को कहा गया है।
पशुपालक पशुओं का समय पर करवाएं टीकाकरण
मानसून के दौरान पशुओं में खुरपका-मुंहपका (FMD) और ब्लैक क्वार्टर (B.Q.) जैसी बीमारियों की संभावना को देखते हुए पशुपालकों को समय पर पशुओं का टीकाकरण करवाने की सलाह दी गई है। वहीं, वर्तमान मौसम और मिट्टी की परिस्थितियों को वृक्षारोपण के लिए अनुकूल बताया गया है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को भारी बारिश के दौरान नदियों, नालों और निचले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह भी दी है, क्योंकि अचानक जलस्तर बढ़ सकता है। किसानों से मौसम और कृषि संबंधी ताजा जानकारी के लिए Meghdoot App का उपयोग करने का आग्रह किया गया है।









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