सोलन। सोलन जिले में अगले पांच दिनों के दौरान मौसम परिवर्तनशील रहने का पूर्वानुमान है। डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय नौणी के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा की ओर से 8 सितंबर को जारी कृषि-मौसम परामर्श के अनुसार जिले के अधिकांश स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 19 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 9 सितंबर को करीब 2 मिलीमीटर, 10 और 11 सितंबर को बारिश नहीं, जबकि 12 और 13 सितंबर को करीब 1 से 2 मिलीमीटर वर्षा होने का अनुमान है। हवा की गति 4.6 से 7 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच उत्तर-पूर्व दिशा से रहने की संभावना है। जिले के लिए फिलहाल कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
अधिक नमी से फफूंद और जीवाणु रोगों का खतरा
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि बढ़ती आर्द्रता और लंबे समय तक नमी बने रहने से फफूंद एवं जीवाणुजनित रोगों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। जड़ सड़न, झुलसा और पत्ती धब्बा जैसे रोगों का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को खेतों की मेड़ों से खरपतवार और झाड़ियों को हटाकर वायु संचार बेहतर बनाए रखने तथा संक्रमित पौधों और रोगग्रस्त हिस्सों को खेत से निकालकर नष्ट करने की सलाह दी गई है।
बागवानों को भी बगीचों में खरपतवार और अनावश्यक झाड़ियों की नियमित सफाई करने तथा संक्रमित फलों और रोगग्रस्त प्ररोहों को तुरंत हटाने की सलाह दी गई है। जलभराव से बचने के लिए खेतों और बगीचों की जल निकासी नालियों को साफ रखने पर भी जोर दिया गया है।
सेब बागवानों के लिए खास सलाह
सेब के बागानों में लगातार बादल और अधिक आर्द्रता की स्थिति को देखते हुए किसी भी प्रकार के रसायन का छिड़काव न करने की सलाह दी गई है। बारिश के दौरान अथवा बारिश रुकने के तुरंत बाद फल तुड़ाई का काम स्थगित रखने तथा गिरे और रोगग्रस्त फलों को नियमित रूप से एकत्र कर नष्ट करने को कहा गया है।
पालक की बुवाई के लिए अनुकूल समय
कृषि सलाह में किसानों को सितंबर के पहले पखवाड़े में साफ मौसम के दौरान पालक की बुवाई करने की सलाह दी गई है। अच्छे अंकुरण और फसल की बेहतर बढ़वार के लिए 25 से 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा 2 से 2.5 किलोग्राम प्रति बीघा बीज की मात्रा तथा 30×10 सेंटीमीटर दूरी रखने की सलाह दी गई है।
टमाटर, गोभी, अदरक और कद्दू के लिए भी सलाह
टमाटर और बैंगन में परिपक्व फलों की समय पर तुड़ाई करने तथा बकआई रॉट और झुलसा रोग की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। संक्रमित पौधों अथवा हिस्सों को तुरंत हटाकर मिट्टी में दबाने और फलों को सीधे मिट्टी के संपर्क से बचाने की सलाह दी गई है।
गोभी और फूलगोभी की बुवाई के लिए नर्सरी बेड तैयार करने, जबकि अदरक एवं हल्दी में जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने और साफ मौसम में अर्थिंग-अप करने की सलाह दी गई है। इन फसलों में राइजोम रॉट की निगरानी भी जरूरी बताई गई है।
कद्दू और अन्य कद्दूवर्गीय फसलों में कीटों की निगरानी के साथ बेलों को सहारा देने तथा फल मक्खी की रोकथाम के लिए प्रति बीघा दो फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है।
पशुपालकों को टीकाकरण की सलाह
मानसून के दौरान पशुओं में खुरपका-मुंहपका (FMD) और ब्लैक क्वार्टर जैसी बीमारियों की आशंका को देखते हुए पशुपालकों को समय पर टीकाकरण करवाने की सलाह दी गई है। पशुओं को सूखे, स्वच्छ और हवादार आश्रय में रखने तथा पर्याप्त स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
कृषि मौसम संबंधी स्थानीय भाषा में जानकारी के लिए किसानों को मेघदूत ऐप का नियमित उपयोग करने की सलाह दी गई है। साफ मौसम के दौरान निराई-गुड़ाई और अर्थिंग-अप जैसे अंतर-सांस्कृतिक कृषि कार्य पूरे करने को भी कहा गया है।










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