सोलन। ऊपरी इलाकों में हुई भारी बारिश का असर अब सोलन शहर की पेयजल व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अश्वनी और गिरि पेयजल योजनाओं के जल स्रोतों में बड़ी मात्रा में लाल मिट्टी और गाद पहुंचने से पानी बेहद मटमैला हो गया। स्थिति बिगड़ने पर जल शक्ति विभाग को करीब दो दिनों तक दोनों योजनाओं से पानी की लिफ्टिंग रोकनी पड़ी।
लिफ्टिंग प्रभावित होने का सीधा असर शहर की पेयजल सप्लाई पर पड़ा है। कई वार्डों में आठ से नौ दिन बीत जाने के बावजूद पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लंबे समय से पानी का इंतजार कर रहे लोगों में विभाग और नगर निगम के प्रति नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।
जरूरत 90 लाख लीटर की, पहुंचा सिर्फ 60 लाख लीटर पानी
जल शक्ति विभाग ने शनिवार और रविवार से दोबारा पानी उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रविवार को मुख्य भंडारण टैंक तक करीब 60 लाख लीटर पानी ही पहुंच पाया, जबकि शहर की रोजाना आवश्यकता लगभग 90 लाख लीटर है।
ऐसे में उपलब्ध पानी और मांग के बीच करीब 30 लाख लीटर का अंतर बना हुआ है। पर्याप्त मात्रा में पानी स्टोर न होने के कारण नगर निगम के लिए सभी वार्डों में नियमित सप्लाई बहाल करना चुनौती बना हुआ है।
कुमारहट्टी और धर्मपुर में भी असर
पेयजल संकट का प्रभाव सोलन शहर के अलावा आसपास के कुमारहट्टी और धर्मपुर क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। पानी की तलाश में लोगों को टैंकरों और प्राकृतिक बावड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
लंबे अंतराल के बाद भी पानी न मिलने से कई इलाकों में लोगों का गुस्सा स्थानीय स्तर पर सप्लाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों पर भी निकल रहा है।
पर्याप्त पानी जमा होते ही बनाई जाएगी सप्लाई व्यवस्था
नगर निगम की महापौर सुषमा शर्मा ने कहा कि पेयजल संकट को देखते हुए विशेष योजना तैयार की गई है। जैसे ही मुख्य टैंकों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा, सभी वार्डों में योजनाबद्ध तरीके से पेयजल सप्लाई बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पेयजल योजनाओं के स्रोतों में बड़ी मात्रा में गाद आने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है।
पानी साफ होने के बाद बढ़ाई जाएगी लिफ्टिंग
जल शक्ति विभाग के एसडीओ ऐन सिंह के अनुसार, योजनाओं में गाद की मात्रा अधिक होने के कारण दो दिनों तक पानी की लिफ्टिंग प्रभावित हुई थी। अब पानी की स्थिति में सुधार होने के साथ लिफ्टिंग दोबारा शुरू कर दी गई है।
विभाग का प्रयास है कि उपलब्ध पानी को जल्द से जल्द मुख्य भंडारण टैंकों तक पहुंचाया जाए, ताकि शहर में पेयजल आपूर्ति को पटरी पर लाया जा सके।










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