2025: भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

On: December 28, 2025 9:08 PM
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नई दिल्ली: 2025 भारत के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियों का साल रहा। देश ने अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में कई अहम मील के पत्थर तय किए हैं, जो भारत की वैश्विक तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाले हैं।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की नई ऊँचाइयाँ
भारत-अमेरिका सहयोगी मिशन निसार (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) के सफल प्रक्षेपण ने भारत को विश्व स्तर पर उन्नत पृथ्वी अवलोकन रडार उपग्रह के मालिक के रूप में स्थापित किया।
जुलाई 2025 में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने। एक्सिओम-4 मिशन के तहत उन्होंने 18 दिन ISS पर बिताए, वैज्ञानिक प्रयोग किए और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी अनुसंधान में हिस्सा लिया।

यह उपलब्धि भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर पर मान्यता देती है और मानव अंतरिक्ष उड़ानों में भारत की महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।

साल के अंत में, इसरो ने 2 नवंबर 2025 को एलवीएम3-एम5 रॉकेट के जरिए CMS-03 उपग्रह को जीटीओ में स्थापित किया। लगभग 4,400 किलोग्राम वजन वाला यह उपग्रह अब तक भारत द्वारा प्रक्षिप्त सबसे भारी उपग्रह है।
दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में स्काईरूट एयरोस्पेस के नए इंफिनिटी कैंपस का उद्घाटन किया और कंपनी के पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-I का अनावरण किया। यह उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

भारत ने केवल दशक भर में निजी अंतरिक्ष उद्योग में तेजी से प्रगति की है। IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorization Centre) के तहत लगभग 330 उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई अब अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े हैं।

विशेष रूप से 2025 में भारत का स्पेडेक्स मिशन दुनिया में चौथे देश के रूप में IN-SPACe डॉकिंग सफल करने वाला बना। अनुमान है कि भारत का अंतरिक्ष उद्योग 2033 तक 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा।

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और विस्तार
दिसंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आण्विक ऊर्जा विधेयक, 2025 को मंजूरी दी, जिसे SUSTAINABLE Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHARNE India) नाम दिया गया। यह कानून परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी की सुविधा देता है और पुराने कानूनों की जगह आधुनिक ढांचा लाता है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में एनपीसीआईएल ने 56,681 एमयू उत्पादन किया, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। राजस्थान में 4-यूनिट माही बांसवाड़ा एनपीपी का शिलान्यास हुआ, जबकि गुजरात के काकरापार में 700MW PHWR की दो इकाइयों को नियमित उत्पादन का लाइसेंस मिल गया। रावतभाटा एनपीपी इकाई-7 ने अप्रैल 2025 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया।

भारत ने फेरोकार्बोनेटाइट (FC) – BARC B1401 नामक स्वदेशी प्रमाणित रेफरेंस मटीरियल (CRM) जारी किया। यह दुर्लभ मृदा तत्वों के खनन में महत्वपूर्ण है और भारत में इस तरह का पहला, और दुनिया में चौथा CRM है।

अनुसंधान एवं नवाचार में तेजी
प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत@2047 की दिशा में अनुसंधान एवं विकास को प्राथमिकता दी। 3 नवंबर 2025 को आरंभ हुए रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) स्कीम फंड में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया।

इसके अलावा, विज्ञान धारा योजना के तहत तीन प्रमुख समग्र योजनाओं को मिलाकर कुल 10,579.84 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक प्रशिक्षण, प्रयोगशालाओं का उन्नयन और खोजों को व्यावसायिक समाधान तक तेजी से पहुँचाना है।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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