संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए अब तक का सबसे क्रांतिकारी कदम उठाया है। साल 2026 से आयोजित होने वाली यूपीएससी की सभी परीक्षाओं में अब परीक्षार्थियों का Face Recognition (चेहरा पहचान) अनिवार्य होगा। यानी अब केवल एडमिट कार्ड दिखाने से एंट्री नहीं मिलेगी, बल्कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तय करेगा कि असली उम्मीदवार कौन है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
आयोग ने यह बदलाव परीक्षाओं में होने वाली जालसाजी और ‘सब्स्टीट्यूशन’ (एक की जगह दूसरे का बैठना) को रोकने के लिए किया है। अक्सर देखा गया है कि मुन्नाभाई और जालसाज फर्जी पहचान पत्र के जरिए परीक्षा केंद्रों में घुस जाते हैं। अब AI Face Authentication के जरिए हर छात्र के चेहरे का मिलान उनके आवेदन फॉर्म में दी गई फोटो से किया जाएगा।
इन प्रमुख परीक्षाओं पर पड़ेगा असर
आयोग के नोटिस के अनुसार, यह नियम यूपीएससी की सभी छोटी-बड़ी भर्ती परीक्षाओं पर लागू होगा, जिनमें शामिल हैं:
- UPSC सिविल सेवा परीक्षा (IAS/IPS)
- NDA (नेशनल डिफेंस एकेडमी)
- CDS (कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज)
- अन्य सभी यूपीएससी भर्ती परीक्षाएं।
अब कैसे मिलेगी एग्जाम सेंटर में एंट्री?
अभी तक उम्मीदवार केवल एडमिट कार्ड और एक आईडी प्रूफ दिखाकर सेंटर में प्रवेश पा लेते थे। लेकिन 2026 से प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी:
- Face Test: गेट पर ही एआई कैमरे उम्मीदवार के चेहरे को स्कैन करेंगे।
- Data Match: एआई सॉफ्टवेयर तुरंत डेटाबेस से फोटो का मिलान करेगा।
- Verification: पहचान पुख्ता होने के बाद ही छात्र को अंदर जाने की अनुमति मिलेगी।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे ईमानदार युवाओं के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है। इससे धांधली रुकेगी और केवल योग्य उम्मीदवारों को ही मौका मिलेगा। हालांकि, छात्रों को अब एग्जाम सेंटर पर थोड़ा पहले पहुंचना पड़ सकता है क्योंकि वेरिफिकेशन प्रक्रिया में समय लग सकता है।
