सिरमौर के लोक कलाकार डॉ. जोगिंदर हाब्बी को संगीत नाटक अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 मिलने पर सम्मानित

सिरमौर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन: लोक कलाकार डॉ. जोगिंदर हाब्बी को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार

Sirmour

राजगढ़ (अक्षय) 11 जून, 2026। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के लिए गर्व और सम्मान का क्षण है। अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त लोक कलाकार एवं लोक संस्कृति के संवाहक डॉ. जोगिंदर हाब्बी का चयन देश के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक सम्मानों में से एक Sangeet Natak Akademi पुरस्कार 2025 के लिए किया गया है। यह सम्मान उन्हें हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति, लोक नृत्य और विलुप्तप्राय लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार में उनके तीन दशक से अधिक समय के असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है।

डॉ. हाब्बी को यह राष्ट्रीय सम्मान महामहिम राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाएगा। उनके चयन की खबर सामने आते ही सिरमौर सहित पूरे हिमाचल प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई है। सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े कलाकारों, साहित्यकारों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया है।

तीन दशक से लोक संस्कृति के संरक्षण में जुटे हैं डॉ. हाब्बी

उपमंडल राजगढ़ के जालग गांव से संबंध रखने वाले डॉ. जोगिंदर हाब्बी पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक लोक विधाओं और लोक नृत्यों को बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे समय में जब आधुनिकता के प्रभाव से कई लोक कलाएं विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी हैं, डॉ. हाब्बी ने उन्हें पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया।

उन्होंने गांव-गांव जाकर लोक कलाकारों से संवाद स्थापित किया, पारंपरिक लोक नृत्यों का दस्तावेजीकरण किया और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का कार्य किया। उनकी मेहनत और समर्पण के कारण कई लोक कलाओं को नई पहचान मिली है।

पद्मश्री विद्यानंद सरैक के साथ किया गहन शोध

डॉ. हाब्बी ने अपने कला गुरु एवं प्रसिद्ध लोक संस्कृति विशेषज्ञ Padma Shri Vidyanand Saraik के मार्गदर्शन में हिमाचल की अनेक दुर्लभ लोक विधाओं पर गहन अध्ययन और शोध किया। उन्होंने विशेष रूप से ठोडा, हाटी की नाटी, सिंहटू नृत्य, बढ़ाल्टू नृत्य और डग्याली नृत्य जैसी पारंपरिक लोक कलाओं के संरक्षण के लिए उल्लेखनीय कार्य किया।

इन लोक विधाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उनके प्रयासों से कई सांस्कृतिक दलों और युवा कलाकारों को मंच मिला और प्रदेश की लोक विरासत को नई ऊर्जा प्राप्त हुई।

चूड़ेश्वर सांस्कृतिक मंडल और आसरा सांस्कृतिक दल के संस्थापक

डॉ. जोगिंदर हाब्बी केवल एक कलाकार ही नहीं बल्कि एक कुशल सांस्कृतिक संगठक भी हैं। वे चूड़ेश्वर सांस्कृतिक मंडल तथा आसरा सांस्कृतिक दल के संस्थापक हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से उन्होंने हजारों युवाओं को लोक संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया है।

इन सांस्कृतिक मंचों ने प्रदेश की लोक कलाओं को देश-विदेश में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में इन संस्थाओं के कलाकारों ने हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

राष्ट्रीय पुरस्कार से बढ़ेगा लोक कलाकारों का उत्साह

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भारत सरकार द्वारा कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है। डॉ. हाब्बी का इस सम्मान के लिए चयन न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और लोक कलाकारों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मान से प्रदेश के युवा कलाकारों को लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रेरणा मिलेगी और पारंपरिक लोक विधाओं के प्रति नई पीढ़ी की रुचि भी बढ़ेगी।

सिरमौर के लिए गौरव का पल
डॉ. जोगिंदर हाब्बी को मिलने वाला संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2025 यह साबित करता है कि यदि समर्पण, शोध और सांस्कृतिक विरासत के प्रति प्रेम हो तो स्थानीय स्तर पर किया गया कार्य भी राष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर सकता है। यह सम्मान न केवल डॉ. हाब्बी की उपलब्धि है बल्कि पूरे सिरमौर, हिमाचल प्रदेश और देश की लोक संस्कृति के लिए गर्व का विषय है।


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