हिमाचल प्रदेश लैपटॉप योजना 2026 के तहत मेधावी विद्यार्थियों को ₹16000 DBT भुगतान।

हिमाचल के मेधावी छात्रों को अब सीधे मिलेंगे ₹16,000! लैपटॉप-टैबलेट योजना में बड़ा बदलाव, सरकार करेगी DBT भुगतान

Himachal

हिमालयन डॉन संवाददाता, शिमला, 11 जून। हिमाचल प्रदेश सरकार की मेधावी विद्यार्थियों के लिए संचालित लैपटॉप-टैबलेट योजना में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब छात्रों को ई-वाउचर या कूपन के बजाय सीधे उनके बैंक खातों में ₹16,000 ट्रांसफर किए जा सकते हैं। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है और अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू की जाएगी।

प्रदेश में दसवीं, बारहवीं और कॉलेज स्तर के करीब 10 हजार मेधावी विद्यार्थियों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने की योजना चलाई जा रही है। पहले चयनित कंपनियों के माध्यम से लैपटॉप और टैबलेट देने की व्यवस्था थी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों ने पुरानी दरों पर सामान उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई है। इसके चलते हजारों छात्रों को लंबे समय से अपने उपकरणों का इंतजार करना पड़ रहा है।

मार्च 2026 में सरकार ने विद्यार्थियों को ₹16,000 के ई-वाउचर जारी किए थे और कई छात्रों ने उपकरणों की बुकिंग भी करवा दी थी। बावजूद इसके दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश विद्यार्थियों को लैपटॉप और टैबलेट नहीं मिल सके। इस दौरान कई रिडीम कार्ड निष्क्रिय हो गए, जिससे छात्र वाउचर राशि का उपयोग भी नहीं कर पाए।

स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अब सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) मॉडल अपनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। विभाग ने सभी जिलों से पात्र विद्यार्थियों का विस्तृत ब्योरा मांगा है और आरटीजीएस के माध्यम से राशि भेजने की संभावनाएं तलाश रहा है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो छात्र अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार लैपटॉप, टैबलेट या अन्य डिजिटल उपकरण खरीद सकेंगे।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि मेधावी विद्यार्थियों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने के लिए सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

पश्चिम एशिया युद्ध का भी पड़ा असर
जानकारी के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसके चलते लैपटॉप और टैबलेट की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चयनित कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत, महंगी रैम और स्टोरेज कीमतों का हवाला देते हुए पुरानी दरों पर उपकरण उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। यही वजह है कि योजना के क्रियान्वयन में देरी हुई और हजारों मेधावी विद्यार्थी प्रभावित हुए।


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