कांगड़ा। हिमालयन डॉन, पठानकोट रेलवे स्टेशन को “डलहौजी रोड” स्टेशन में शिफ्ट करने अथवा संचालन व्यवस्था में बदलाव की कथित योजना को लेकर हिमाचल प्रदेश और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। कांगड़ा घाटी और मंडी क्षेत्र की जनता ने इस प्रस्ताव को जनहित के खिलाफ बताते हुए राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. सिकंदर कुमार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
जनता द्वारा भेजे गए एक ज्ञापन में इस प्रस्तावित बदलाव को क्षेत्रीय रेल व्यवस्था, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। लोगों का कहना है कि पठानकोट रेलवे स्टेशन उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक रेलवे जंक्शन है, जो जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इसका स्थानांतरण पूरे रेल नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है।
ज्ञापन में विशेष रूप से कांगड़ा घाटी रेलवे का मुद्दा उठाया गया है, जो एक ऐतिहासिक धरोहर रेल लाइन मानी जाती है। यह रेलमार्ग सीधे तौर पर पठानकोट से जुड़ा हुआ है। यदि स्टेशन शिफ्ट होता है, तो यात्रियों की कनेक्टिविटी प्रभावित होगी और उन्हें अतिरिक्त दूरी तथा खर्च का सामना करना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान में पठानकोट स्टेशन बस स्टैंड, टैक्सी सेवाओं, अस्पतालों और बाजारों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। इसके स्थानांतरण से यात्रियों विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और छात्रों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। साथ ही रात के समय सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।
पर्यटन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है। पठानकोट हिमाचल के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों जैसे ज्वालामुखी मंदिर, चिंतपूर्णी मंदिर, बगलामुखी मंदिर, कांगड़ा मंदिर, चामुंडा देवी मंदिर, बैजनाथ मंदिर और धर्मशाला के लिए मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसे में स्टेशन के स्थानांतरण से पर्यटन उद्योग, होटल व्यवसाय, टैक्सी सेवाओं और स्थानीय रोजगार पर सीधा असर पड़ सकता है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि पठानकोट स्टेशन पर पहले से ही प्लेटफॉर्म, यार्ड, स्टाफ और अन्य यात्री सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में इसे स्थानांतरित करना संसाधनों की बर्बादी होगी। लोगों का सुझाव है कि इन संसाधनों का उपयोग हिमाचल में नई रेल परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाना चाहिए।
सामरिक दृष्टि से भी इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण बताते हुए लोगों ने कहा कि पठानकोट सेना और आपातकालीन सेवाओं के लिए अहम केंद्र है। स्टेशन के स्थानांतरण से सुरक्षा और लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ सकता है।
जनता ने यह भी आरोप लगाया कि यदि इस तरह का निर्णय बिना जनसुनवाई और जनप्रतिनिधियों की सहमति के लिया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत होगा और इससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ सकता है।
”यह केवल एक स्टेशन बदलने की बात नहीं है, यह हिमाचल के रोजगार, व्यापार और रेल कनेक्टिविटी के भविष्य का सवाल है। बिना जन-सुनवाई के ऐसा निर्णय लोकतंत्र के विरुद्ध है।” — सतीश शर्मा
जनता की प्रमुख मांगें:
- पठानकोट रेलवे स्टेशन के शिफ्ट या संचालन परिवर्तन की किसी भी योजना को तत्काल रोका जाए
- इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय समीक्षा समिति गठित की जाए
- कांगड़ा घाटी रेलवे और हिमाचल की रेल सेवाओं को संरक्षित रखा जाए
- किसी भी प्रस्ताव को सार्वजनिक कर जनप्रतिनिधियों से चर्चा के बाद ही निर्णय लिया जाए
जनता ने सांसद डॉ. सिकंदर कुमार से अपील की है कि वह इस गंभीर जनहित मुद्दे पर केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय के समक्ष मामला उठाकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
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रतन चंद जी नमस्कार🙏 'हिमालयन डान' के नए स्वरूप को सराहने और अपनी आत्मीय शुभकामनाएं भेजने के लिए हम आपका…