सांसद हर्ष महाजन का रेल मंत्री को पत्र और कांगड़ा घाटी में चलती टॉय ट्रेन का दृश्य।

कांगड़ा वैली रेल मार्ग की बहाली के लिए सांसद हर्ष महाजन ने उठाई आवाज़; रेल मंत्री को लिखा पत्र

Kangra

हिमालयन डॉन, शिमला: हिमाचल प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कांगड़ा घाटी की जीवनरेखा मानी जाने वाली पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरो गेज रेलवे लाइन को लेकर मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्र की जनता और ‘कांगड़ा वैली रेलवे संघर्ष समिति’ की लंबे समय से चली आ रही माँगों का समर्थन करते हुए महाजन ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस रेल सेवा को जल्द से जल्द बहाल करने का आग्रह किया है।

चार साल का लंबा इंतज़ार, जनता बेहाल

​सांसद महाजन ने अपने पत्र में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि पिछले 4 वर्षों से इस ऐतिहासिक रेल मार्ग पर सेवाओं के बाधित होने के कारण स्थानीय निवासियों, पर्यटकों, छात्रों और मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह रेल मार्ग केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि घाटी की आर्थिकी और कनेक्टिविटी की रीढ़ है।

पठानकोट स्टेशन को शिफ्ट करने का कड़ा विरोध

​पत्र के माध्यम से महाजन ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर रेल मंत्री का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने पठानकोट रेलवे स्टेशन को शहर से दूर मामून कैंटोनमेंट में स्थानांतरित करने के किसी भी संभावित प्रस्ताव का विरोध किया है।

उनके मुख्य तर्क:

  • रणनीतिक स्थान: वर्तमान स्टेशन पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से बस स्टैंड, अस्पतालों, बाज़ारों और सैन्य प्रतिष्ठानों के करीब होने के कारण जनता के लिए सुलभ है।
  • आर्थिक बोझ: स्टेशन को शहर से दूर शिफ्ट करने से यात्रियों का यात्रा समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे।
  • कनेक्टिविटी में कमी: इस बदलाव से कांगड़ा घाटी का मौजूदा रेल नेटवर्क और कमज़ोर हो सकता है।

त्वरित कार्रवाई की उम्मीद

​सांसद हर्ष महाजन ने विश्वास जताया है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में कांगड़ा घाटी के लोगों की इन जायज चिंताओं को संवेदनशीलता के साथ सुना जाएगा। उन्होंने मांग की है कि:

  1. ​पठानकोट और जोगिंदर नगर के बीच रेल सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए।
  2. ​पठानकोट स्टेशन को शिफ्ट करने के किसी भी प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए।

​इस पत्र के बाद अब कांगड़ा घाटी के लोगों की नज़रें केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं।

यह भी पढ़ें:- हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की गोपनीयता दांव पर: लावारिस मिलीं छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं, SFI ने उठाए गंभीर सवाल

हिमाचल प्रदेश की सभी ताज़ा और सटीक खबरों के लिए जुड़े रहें हिमालयन डॉन के साथ।
WhatsApp चैनल:
Join WhatsApp Channel⁠
Telegram चैनल:
Join Telegram Channel⁠
Facebook पेज:
Join Facebook Page

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *