हिमाचल प्रदेश के प्रवेश द्वारों पर ‘अपने’ ही चुका रहे टोल: स्थानीय निवासियों ने उठाई छूट की मांग

On: February 23, 2026 7:40 AM
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Himachal Pradesh border toll plaza protest local residents demand tax exemption
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सोलन: हिमाचल प्रदेश के प्रवेश द्वारों पर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से वसूले जाने वाले टोल टैक्स को लेकर अब विरोध के सुर तेज होने लगे हैं। ताज़ा मामला प्रदेश के स्थायी निवासियों से जुड़ा है, जो दूसरे राज्यों में काम करते हैं लेकिन अपने घर लौटते समय उन्हें टोल चुकाना पड़ता है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि अपने ही राज्य में प्रवेश के लिए शुल्क देना तर्कसंगत नहीं है।

​क्या है पूरा मामला?

​हिमाचल प्रदेश के हजारों परिवार रोजी-रोटी के लिए पड़ोसी राज्यों जैसे चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड में बसे हुए हैं। इनमें से कई लोग सरकारी और निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं, तो कई अपना छोटा व्यापार चलाते हैं। इन लोगों के पास अक्सर उन राज्यों के नंबर वाले वाहन (जैसे HR, CH, DL, PB) होते हैं।

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​जब ये लोग पारिवारिक कार्यों, बच्चों की पढ़ाई या छुट्टियों में अपने पैतृक घर हिमाचल लौटते हैं, तो बॉर्डर पर स्थित टोल बैरियरों पर उन्हें भारी टैक्स देना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे मूल रूप से हिमाचल के ही निवासी हैं, ऐसे में उनसे यह वसूली करना न्यायोचित नहीं है।

​’विशेष स्टिकर’ या ‘प्रमाण पत्र’ का सुझाव

​इस मुद्दे को लेकर हिन्दुस्तान जन सेवा समिति ने सरकार के सामने एक ठोस प्रस्ताव रखा है। समिति के अध्यक्ष आर.पी. जोशी ने मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि:

  • ​स्थानीय निवासियों को इस आर्थिक बोझ से राहत दी जाए।
  • ​तहसील या उप-तहसील स्तर पर एक विशेष प्रमाण पत्र या वाहन स्टिकर जारी किया जाए।
  • ​इस स्टिकर को दिखाकर स्थानीय लोगों को टोल में छूट मिल सके।

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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