शिमला | 31 दिसंबर 2025
भारत के ऊर्जा इतिहास में वर्ष 2025 को एक ‘टर्निंग पॉइंट’ के रूप में याद किया जाएगा। यह वह वर्ष है जब भारत ने केवल भविष्य के सपने नहीं बुने, बल्कि दशकों से अटके पड़े सुधारों को ज़मीन पर उतारकर अपनी ऊर्जा संप्रभुता (Energy Sovereignty) को सुरक्षित किया। परमाणु ऊर्जा से लेकर महत्वपूर्ण खनिजों तक, भारत अब केवल एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है।
परमाणु ऊर्जा: 60 साल के इंतजार का अंत
वर्ष 2025 का सबसे क्रांतिकारी कदम रहा ‘शांति विधेयक’ का पारित होना।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी: इस कानून ने 1960 के दशक से चले आ रहे पुराने ढांचे को तोड़ते हुए परमाणु क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोल दिया है।
- विदेशी निवेश का आकर्षण: उम्मीद है कि 2047 तक इस क्षेत्र में 100-150 बिलियन डॉलर की नई पूंजी आएगी, जिससे परमाणु ऊर्जा उत्पादन में 12-14 गुना की भारी बढ़ोतरी होगी।
- परिवर्तन: यह सुधार 2008 के परमाणु समझौते के बाद की उस शून्यता को भरता है, जहाँ कूटनीतिक जीत तो मिली थी लेकिन धरातल पर बदलाव नहीं आया था।
नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन: भविष्य की सुरक्षा
स्वच्छ ऊर्जा (EV और सोलर) के लिए लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे खनिजों की अहमियत को समझते हुए भारत ने ₹32,000 करोड़ का रणनीतिक मिशन शुरू किया है।
- रणनीतिक बढ़त: भारत अब केवल कच्चे माल का खनन नहीं करेगा, बल्कि देश के भीतर ही इसकी प्रोसेसिंग और मैन्यूफैक्चरिंग करेगा।
- दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements): ₹7,280 करोड़ की पहल से अब इलेक्ट्रिक वाहनों और विंड टर्बाइन के लिए ज़रूरी ‘मैग्नेट्स’ का निर्माण भारत में ही होगा, जिससे चीन जैसे देशों पर निर्भरता खत्म होगी।
- नया नियम: “एक पट्टा, अनेक खनिज” नीति से खनन क्षेत्र में लालफीताशाही खत्म हुई है और खोज में तेज़ी आई है।
बिजली क्षेत्र: ब्लैकआउट से कम्पटीशन तक
जुलाई 2012 के ऐतिहासिक ब्लैकआउट की यादों को पीछे छोड़ते हुए, विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 ने वितरण प्रणाली में प्रतिस्पर्धा और अनुशासन की नई नींव रखी है।
- स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर: अब फोकस केवल बिजली पहुँचाने पर नहीं, बल्कि नेटवर्क के आधुनिकीकरण और वित्तीय अनुशासन पर है।
- किसानों का हित: पीएम सूर्य घर और पीएम-कुसुम योजनाओं के माध्यम से सौर ऊर्जा को सीधे खेतों और घरों की छतों तक पहुँचाया गया है।
नवीकरणीय ऊर्जा: दुनिया का नेतृत्व करता भारत
2025 के मध्य तक, भारत स्वच्छ ऊर्जा के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शुमार हो चुका है:
- वैश्विक रैंकिंग: सौर ऊर्जा में तीसरा और पवन ऊर्जा में चौथा स्थान।
- लक्ष्यों से आगे: भारत ने पेरिस जलवायु समझौते के अपने लक्ष्यों को समय से कई साल पहले ही हासिल कर लिया है। आज भारत की 44% बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म (Non-fossil) स्रोतों से आती है।
प्रतीकों से परे, परिणामों का वर्ष
अतीत में ऊर्जा सुधार केवल नारों और प्रतीकों तक सीमित थे, लेकिन 2025 ‘Action’ का वर्ष रहा। 4-ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए भारत ने अपनी प्रणालियों को नए सिरे से डिजाइन किया है। अब भारत भविष्य का आयात नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य को स्वयं निर्मित कर रहा है।













रतन चंद जी नमस्कार🙏 'हिमालयन डान' के नए स्वरूप को सराहने और अपनी आत्मीय शुभकामनाएं भेजने के लिए हम आपका…