चौपाल के रितिक चौहान ‘उत्तम जीवन रक्षा पदक’ से सम्मानित: दो मासूमों की जान बचाने के लिए गंवाया था पैर

On: January 26, 2026 3:58 PM
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चौपाल के रितिक चौहान 'उत्तम जीवन रक्षा पदक' से सम्मानित
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शिमला: “बहादुरी वह नहीं जिसमें डर न हो, बल्कि बहादुरी वह है जिसमें डर पर जीत पाकर दूसरों की जान बचाई जाए।” हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रहने वाले 25 वर्षीय रितिक चौहान ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। अपनी जान की बाजी लगाकर दो मासूमों को नई जिंदगी देने वाले इस जांबाज नायक को आज उनकी अदम्य वीरता के लिए ‘उत्तम जीवन रक्षा पदक’ से नवाजा गया।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने गणतंत्र दिवस के गरिमामय समारोह में रितिक चौहान को यह सम्मान प्रदान किया। रितिक ने पिछले साल कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर जो किया, वह आज हर किसी की आंखों में गर्व और सम्मान के आंसू ले आता है।

वह खौफनाक मंजर: जब काल बनकर आई ट्रेन

घटना 8 अप्रैल 2024 की है। सोलन के पास कालका-शिमला हेरिटेज ट्रैक पर बिलासपुर की दो छोटी बच्चियां खेल रही थीं। खेल-खेल में वे ट्रैक के बीचों-बीच आ गईं। तभी अचानक तेज रफ्तार ट्रेन वहां पहुंच गई। बच्चियां डर के मारे सुध-बुध खो बैठीं और ट्रैक पर ही जमी रह गईं।

पास ही खड़े रितिक चौहान ने जब यह देखा, तो उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की। सामने साक्षात मौत (ट्रेन) खड़ी थी, लेकिन रितिक ने पीछे हटने के बजाय मौत को चुनौती देना बेहतर समझा।

खुद घायल हुए, पर बच्चियों को खरोंच तक नहीं आने दी

रितिक ने बिजली की तेजी से दौड़ लगाई और ट्रैक पर खड़ी दोनों बच्चियों को पूरी ताकत से धक्का देकर सुरक्षित बाहर फेंक दिया। बच्चियां तो बच गईं, लेकिन इस कोशिश में रितिक खुद ट्रेन की चपेट में आ गए। उनका पैर ट्रेन के पहियों के नीचे आ गया। गंभीर हालत में उन्हें PGI चंडीगढ़ ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों को संक्रमण फैलने से रोकने के लिए रितिक का पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा।

“पैर गया तो क्या, दो घरों के चिराग तो बच गए”

जिस उम्र में युवा अपने करियर और भविष्य के सपने बुनते हैं, रितिक उस उम्र में कृत्रिम पैर (Artificial Limb) के सहारे चलने को मजबूर हुए। लेकिन उनके हौसले आज भी हिमालय जैसे ऊंचे हैं। सम्मान समारोह के दौरान रितिक ने कहा:

“अगर मैं उस दिन पीछे हट जाता, तो शायद खुद को कभी माफ नहीं कर पाता। मेरा पैर चला गया, लेकिन खुशी इस बात की है कि दो परिवारों की खुशियां सलामत हैं। अगर दोबारा ऐसा मौका मिले, तो मैं फिर यही करूंगा।”

सम्मान और प्रेरणा

राज्यपाल ने चंबी डाकघर के गगाना गांव (चौपाल) के इस सपूत को सम्मानित करते हुए कहा कि रितिक की बहादुरी युवाओं के लिए मिसाल है। समाज को आज ऐसे ही निस्वार्थ नायकों की जरूरत है।

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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