सोलन: कमलेश ठाकुर। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में ‘सतत उत्पादकता के लिए सब्जी बीज उत्पादन’ पर आधारित 10 दिवसीय उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कृषि विशेषज्ञों ने भविष्य की खाद्य सुरक्षा पर मंथन किया।
मुख्य बातें:
- उद्देश्य: बढ़ती जनसंख्या के लिए पोषण सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- भागीदारी: आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के 14 वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।
- आयोजन: विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग में स्थित उन्नत संकाय प्रशिक्षण केंद्र (सब्जी) द्वारा।
गुणवत्तापूर्ण बीज ही भविष्य की कुंजी: डॉ. देविना वैद्य
समापन सत्र की मुख्य अतिथि एवं अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य ने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे ऐसी नवाचार आधारित तकनीकों पर काम करें जिससे किसानों को समय पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज मिल सकें। उन्होंने जोर दिया कि:
- देश की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सब्जियों के उत्पादन क्षेत्र का विस्तार जरूरी है।
- उच्च पोषण मूल्य वाली किस्मों के विकास पर ध्यान देना अनिवार्य है।
- सतत कृषि के लिए उन्नत तकनीकों का जमीनी स्तर पर पहुंचना आवश्यक है।
32 वर्षों का गौरवशाली इतिहास
सब्जी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हैप्पी देव शर्मा ने बताया कि यह केंद्र 1994 से कार्यरत है। अब तक यहाँ 34 उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे पिछले तीन दशकों में 600 से अधिक वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया गया है।
प्रशिक्षण के अंत में सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जहाँ विशेषज्ञों ने आधुनिक बीज उत्पादन और पोषण सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर अपने व्याख्यान साझा किए।
इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से न केवल वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि सीधे तौर पर किसानों की आय और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आता है।
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