चूड़धार पर हाईकोर्ट सख्त: नई सड़क और तारकोल के काम पर रोक, चंद्रताल-शिकारी देवी भी दायरे में

On: August 20, 2026 10:38 AM
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चूड़धार में सड़क निर्माण पर हिमाचल हाईकोर्ट की सख्ती
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के बेहद संवेदनशील और नाजुक पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते निर्माण और पर्यटन गतिविधियों को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने चूड़धार, चंद्रताल और शिकारी देवी जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में नई सड़कें बनाने और मौजूदा सड़कों पर तारकोल बिछाने के काम पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है। अदालत ने राज्य सरकार से इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण, पर्यटन गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई अहम सवालों पर जवाब मांगा है।

चूड़धार में बढ़ती सड़क पहुंच पर कोर्ट की नजर
हाईकोर्ट ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि जिन क्षेत्रों में स्थानीय आबादी बेहद कम है, वहां भी सड़क पहुंच लगातार बढ़ाई जा रही है। अदालत ने सवाल उठाया कि वन संरक्षण अधिनियम के तहत स्वीकृतियों का हवाला देकर क्या ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क निर्माण को उचित ठहराया जा सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोग मुख्य रूप से पर्यटन या धार्मिक गतिविधियों के लिए पहुंचते हैं।

कोर्ट का मानना है कि दुर्गम इलाकों तक वाहनों की आसान पहुंच बढ़ने से मानवीय गतिविधियां भी तेजी से बढ़ सकती हैं। इससे जंगलों, जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

चंद्रताल में कैंपिंग पर भी उठे सवाल
चंद्रताल क्षेत्र में पर्यटकों के रात में ठहरने और कैंपिंग को लेकर भी हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। अदालत ने जानना चाहा कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या से पैदा होने वाले पर्यावरणीय दबाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं।

प्लास्टिक और मानव अपशिष्ट ने बढ़ाई चिंता
संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर बढ़ते प्लास्टिक कचरे और मानव अपशिष्ट के निपटारे को लेकर भी कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने मोबाइल शौचालयों, सफाई व्यवस्था और ठोस कचरा प्रबंधन की मौजूदा स्थिति की जानकारी देने को कहा है।

हाईकोर्ट की चिंता है कि यदि इन इलाकों में पर्यटन बढ़ता रहा और कचरा निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई, तो हिमालयी पर्यावरण को लंबे समय तक नुकसान हो सकता है।

वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगा जवाब
मामले में वन विभाग के प्रधान सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है। अदालत ने संबंधित विभागों से पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन के लिए उठाए गए कदमों पर जवाब मांगा है।

मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
चूड़धार समेत हिमाचल के संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क और पर्यटन विकास को लेकर हाईकोर्ट की यह सख्ती पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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