हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की गोपनीयता दांव पर: लावारिस मिलीं छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं, SFI ने उठाए गंभीर सवाल

On: April 18, 2026 2:04 PM
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HPU exam answer sheets being transported in public bus Himachal Pradesh.
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हिमालयन डॉन, शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) की कार्यप्रणाली और परीक्षाओं की गोपनीयता एक बार फिर विवादों के घेरे में है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की विश्वविद्यालय इकाई ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहा है।

​छात्रों की बसों में ढोई जा रही हैं उत्तर पुस्तिकाएं

​एसएफआई ने संजौली महाविद्यालय के पास की कुछ तस्वीरों का हवाला देते हुए खुलासा किया कि वर्तमान में चल रही वार्षिक परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं को बेहद असुरक्षित तरीके से ले जाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि नियमानुसार इन पुस्तिकाओं को पूर्ण गोपनीयता के साथ ‘सीक्रेसी बस’ में ले जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान में इन्हें उन बसों में लादा जा रहा है जिनमें छात्र सफर करते हैं।

​बाईपास रोड पर ‘लावारिस’ हालत में दिखीं कॉपियां

​एसएफआई के पदाधिकारियों ने बताया कि संजौली बाईपास रोड पर इन उत्तर पुस्तिकाओं को किसी लावारिस वस्तु की तरह असुरक्षित तरीके से रखा गया था। यह न केवल विश्वविद्यालय की गोपनीयता पर हमला है, बल्कि उन हजारों छात्रों के साथ भी अन्याय है जो साल भर मेहनत कर परीक्षा देते हैं।

आंसर शीट्स बाय पास रोड shimla

​विश्वविद्यालय की बदहाल व्यवस्था पर हमला

​संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल दागे हैं:

  • ​सीक्रेसी बस का अभाव: विश्वविद्यालय के पास उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित लाने-ले जाने के लिए मात्र एक सीक्रेसी बस है। प्रशासन नई बस खरीदने के बजाय असुरक्षित माध्यमों का सहारा ले रहा है।
  • ​चेकिंग सेंटर पर सवाल: आरोप है कि उत्तर पुस्तिकाओं को चेक करने के केंद्र अब महाविद्यालय अपनी सुविधानुसार चुन रहे हैं, जबकि पारदर्शिता के लिए इन्हें अक्सर राज्य के बाहर भेजा जाता था।

​प्रशासन को चेतावनी

​परिसर अध्यक्ष योगी और परिसर सचिव मुकेश कुमार ने संयुक्त बयान में मांग की है कि विश्वविद्यालय की गोपनीयता के साथ किए जा रहे इस खिलवाड़ को तुरंत बंद किया जाए। एसएफआई ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए और गोपनीयता बरकरार नहीं रखी गई, तो संगठन उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।

​संपादकीय टिप्पणी: परीक्षा जैसे संवेदनशील कार्य में इस तरह की लापरवाही विश्वविद्यालय की साख को बट्टा लगाती है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या पेपर लीक जैसी घटना का इंतज़ार कर रहा है?

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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