शिमला में गैस की कमी के कारण बढ़ी बिजली से चलने वाले चूल्हों की बिक्री।

गैस की किल्लत से चूल्हे ठंडे, इंडक्शन और लकड़ी के सहारे होटल-ढाबे

Shimla

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला इन दिनों एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है। पिछले करीब एक सप्ताह से व्यावसायिक (Commercial) एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने के कारण शहर के खान-पान उद्योग पर ताले लटकने की नौबत आ गई है। स्थिति इतनी विकट है कि होटल, ढाबा और छोटे रेस्टोरेंट संचालकों के सामने ग्राहकों को भोजन उपलब्ध कराने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते कई कारोबारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में बिजली और पारंपरिक साधनों का रुख किया है।

​बाजार में इंडक्शन हीटर की रिकॉर्ड मांग

​गैस की किल्लत का सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर देखने को मिल रहा है। शिमला के मॉल रोड स्थित व्यापारियों के अनुसार, खाना पकाने के लिए बिजली से चलने वाले इंडक्शन हीटर की मांग रातों-रात कई गुना बढ़ गई है। स्थानीय कारोबारी दीपेश और महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि जहाँ पहले पूरे हफ्ते में मुश्किल से 3-4 इंडक्शन बिकते थे, अब वहां रोजाना 10 से 15 यूनिट की बिक्री हो रही है। लोग मजबूरी में इंडक्शन खरीद रहे हैं ताकि उनका कामकाज पूरी तरह बंद न हो।

​विशेष बर्तनों की भी बढ़ी खरीदारी

​इंडक्शन की बढ़ती मांग के साथ ही इससे जुड़े अन्य सामानों की बिक्री में भी भारी उछाल आया है। दुकानदार बताते हैं कि जो ग्राहक इंडक्शन खरीद रहे हैं, वे साथ में इंडक्शन-फ्रेंडली कड़ाही, तवा और पतीले भी ले रहे हैं। इसके कारण बाजार में इन बर्तनों का स्टॉक भी तेजी से खत्म हो रहा है। होटल व्यवसायी राजीव भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने अपने होटल के लिए सीधे चंडीगढ़ से 10 इंडक्शन ऑर्डर किए हैं, क्योंकि पर्यटकों को भूखा नहीं रखा जा सकता।

​पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों की वापसी

​मौजूदा संकट से निपटने के लिए कई लोग अब पुराने समय की तरह लकड़ी से जलने वाले चूल्हों का सहारा लेने लगे हैं। शिमला के कई ढाबों और होटलों के बाहर अब लकड़ियां सुलगती देखी जा सकती हैं। कारोबारियों का कहना है कि गैस के बिना काम चलाना असंभव है, इसलिए वे मजबूरी में इन पारंपरिक तरीकों को अपना रहे हैं ताकि कम से कम दाल-रोटी का इंतजाम होता रहे।

​अंतरराष्ट्रीय तनाव का स्थानीय असर

​जानकारों के मुताबिक, खाड़ी देशों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर एलपीजी की वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है, जिसके कारण हिमाचल प्रदेश में गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है। फिलहाल बाजार से कमर्शियल सिलेंडर लगभग नदारद हैं और अब धीरे-धीरे घरेलू एलपीजी की कमी भी महसूस होने लगी है। यदि अगले 2-3 दिनों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो राजधानी में गैस का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है और दर्जनों होटलों में कामकाज पूरी तरह ठप हो जाएगा।

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