मंडी, 23 जनवरी। बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई भी कोताही भविष्य में भारी पड़ सकती है, इसी गंभीरता को देखते हुए एसडीएम मंडी सदर, रूपिन्द्र कौर ने उपमण्डल के सभी निजी स्कूल प्रबंधकों और संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। वीरवार को आयोजित एक विशेष समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूली बच्चों का जीवन अनमोल है और बसों के संचालन में निर्धारित सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन
एसडीएम ने बैठक में कहा कि अक्सर देखा जाता है कि कागजी कार्रवाई पूरी होने के बावजूद धरातल पर बसों की स्थिति संतोषजनक नहीं होती। उन्होंने निर्देश दिए कि अब स्कूल बसों की नियमित और औचक जांच (Surprise Inspection) की जाएगी। यदि किसी भी बस में सुरक्षा उपकरणों की कमी पाई गई, तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अनिवार्य चेकलिस्ट और दस्तावेज
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक स्कूल बस के पास निम्नलिखित मानक पूरे होने अनिवार्य हैं:
- दस्तावेजी पूर्णता: बस का फिटनेस प्रमाण पत्र, वैध बीमा, परमिट और अद्यतन पॉल्यूशन नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) होना अनिवार्य है।
- तकनीकी सुरक्षा: बसों में स्पीड गवर्नर (गति सीमा यंत्र) सक्रिय होना चाहिए। इसके अलावा, फर्स्ट एड बॉक्स में दवाइयों की उपलब्धता, अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) और स्पष्ट रूप से कार्यशील आपातकालीन निकास द्वार होना चाहिए।
- चालक और स्टाफ: बस चालकों के पास वैध भारी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। एसडीएम ने जोर दिया कि चालक न केवल अनुभवी हों, बल्कि उनका चरित्र सत्यापन भी हो और वे पूरी तरह नशामुक्त हों।
परिचालन और सतर्कता पर जोर
बैठक के दौरान एसडीएम ने ओवरलोडिंग की समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना दुर्घटनाओं को निमंत्रण देना है। स्कूल प्रबंधकों को निर्देश दिए गए कि:
- बच्चों के बस में चढ़ने और उतरने के समय एक सहायक या परिचालक की उपस्थिति अनिवार्य हो।
- बसों की यांत्रिक जांच (Mechanical Check-up) समय-समय पर अधिकृत केंद्रों से करवाई जाए।
- स्कूल स्तर पर बच्चों और स्टाफ के लिए सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएं।
इस उच्च स्तरीय बैठक में तहसीलदार सदर, नायब तहसीलदार कटौला, थाना प्रभारी सदर, उप-निदेशक प्राथमिक शिक्षा, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) और हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के प्रतिनिधियों सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सभी विभागों को आपसी समन्वय से काम करने को कहा गया है ताकि स्कूली परिवहन व्यवस्था को अभेद्य बनाया जा सके।










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