हरिपुरधार में हिमपात

हरिपुरधार में हिमपात: सफेद चादर में लिपटी वादियां, कृषि और पर्यटन के लिए ‘श्वेत वरदान’

Sirmour

हरिपुरधार: हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों सहित राजधानी शिमला और सिरमौर के हरिपुरधार व नोहराधार में सीजन की पहली बर्फबारी ने दस्तक दे दी है। लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे प्रदेश के लिए यह हिमपात केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि एक ‘श्वेत वरदान’ बनकर आया है। इस ताजा बर्फबारी से जहां पहाड़ चांदी की तरह चमक उठे हैं, वहीं किसानों, बागवानों और व्यापारियों के चेहरों पर काफी समय के बाद ऐसी रौनक दिखी है।

किसानी को मिला जीवनदान: लहसुन की फसल में लौटेगी जान

​क्षेत्र में कृषि और बागवानी की महत्ता को रेखांकित करते हुए हरिपुरधार निवासी गोविंद चंद बताते हैं कि इस बर्फबारी ने क्षेत्र को संजीवनी प्रदान की है। उन्होंने कहा, “यहाँ की अधिकांश आबादी कृषि और बागवानी पर निर्भर है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण हमारी प्रमुख नकदी फसल लहसुन पर संकट के बादल छा गए थे। अब बर्फबारी और निचले इलाकों में हुई बारिश से फसल में नई जान आएगी।”

पर्यटन और कारोबार को पंख: स्थानीय व्यापारियों में उत्साह

​बर्फबारी केवल खेती ही नहीं, बल्कि पर्यटन आधारित आर्थिकी के लिए भी नई उम्मीद लाई है। हरिपुरधार के स्थानीय निवासी विजय राणा संजू का कहना है कि इस बर्फबारी से पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “बर्फ की सफेद चादर बिछते ही पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र के होटल कारोबारियों और छोटे दुकानदारों के व्यापार में तेजी आएगी। यह बर्फबारी पर्यटन क्षेत्र के लिए एक नई सुबह जैसी है।”

कृषि और बागवानी को होने वाले प्रमुख लाभ

​इस हिमपात से न केवल नकदी फसलों को जीवनदान मिला है, बल्कि बागवानी क्षेत्र को भी बड़े फायदे होंगे:

  • लहसुन और रबी फसलों को लाभ: लंबे सूखे के बाद हुई यह बारिश और बर्फबारी मिट्टी की नमी को वापस लाई है, जो लहसुन और गेहूं जैसी फसलों की वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • चिलिंग ऑवर्स की पूर्ति: सेब के बगीचों के लिए आवश्यक कम तापमान (Chilling Hours) अब पूरा हो सकेगा, जिससे आने वाले सीजन में फलों की सेटिंग अच्छी होगी।
  • प्राकृतिक कीट नियंत्रण: बर्फबारी और कड़ाके की ठंड से बगीचों में पनपने वाले हानिकारक कीट और बीमारियां प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाती हैं।

बर्फबारी ने न केवल सूखे की चिंता को खत्म किया है, बल्कि प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन और बागवानी को भी नई ऊर्जा दी है। अब होटल कारोबारी सैलानियों के स्वागत के लिए और किसान अपने खेतों में नई उम्मीद के साथ तैयार हैं।

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