बसंत पंचमी 2026: दशकों बाद बना ऐसा दुर्लभ संयोग! 4 खास योगों में होगी सरस्वती पूजा, जानें क्या है खास

On: January 22, 2026 10:58 PM
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बसंत पंचमी 2026: दशकों बाद बना ऐसा दुर्लभ संयोग
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डिजिटल डेस्क: हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का त्योहार ज्ञान, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। साल 2026 में वसंत पंचमी का पर्व बेहद खास होने जा रहा है। इस बार ग्रहों और नक्षत्रों की ऐसी स्थिति बन रही है कि 23 जनवरी 2026 को एक नहीं, बल्कि चार विशेष योगों का महासंयोग बन रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, ऐसे दुर्लभ संयोग में की गई पूजा-अर्चना विद्यार्थियों और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए अपार सफलता के द्वार खोलती है।

​2026 में वसंत पंचमी पर चार खास योग

​इस वर्ष वसंत पंचमी के दिन निम्नलिखित चार शुभ योग बन रहे हैं, जो इस दिन की महत्ता को कई गुना बढ़ा देते हैं:

  1. ​सर्वार्थ सिद्धि योग: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस योग में किया गया हर कार्य सिद्ध होता है और शुभ फल प्रदान करता है।
  2. ​रवि योग: सूर्य के प्रभाव वाला यह योग बाधाओं को दूर करने और मान-सम्मान में वृद्धि के लिए उत्तम माना जाता है।
  3. ​शिव योग: यह आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए श्रेष्ठ है।
  4. ​सिद्ध योग: किसी भी नए कार्य या विद्या के आरम्भ के लिए इस योग को अत्यंत भाग्यशाली माना जाता है।
​मां सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त (Vasant Panchami Shubh Muhurat)

​पंचांग गणना के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी तिथि का प्रारंभ और समापन नीचे दिए गए समय पर होगा:

  • ​पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी 2026 को रात 08:45 बजे से।
  • ​पंचमी तिथि समाप्त: 23 जनवरी 2026 को रात 10:15 बजे तक।
  • ​उदयातिथि के अनुसार: चूंकि सूर्योदय के समय पंचमी तिथि 23 जनवरी को है, इसलिए मुख्य पर्व 23 जनवरी 2026 को ही मनाया जाएगा।

​पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय:

शास्त्रों के अनुसार, वसंत पंचमी की पूजा ‘पूर्वाह्न’ काल (सूर्योदय से मध्यकाल तक) में करना श्रेष्ठ होता है।

  • ​शुभ मुहूर्त: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक।
  • ​कुल अवधि: लगभग 5 घंटे 22 मिनट।
​क्यों खास है इस बार की वसंत पंचमी?

​ज्योतिषियों का मानना है कि चार योगों के एक साथ आने से यह दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ की शक्ति को और अधिक बढ़ा देता है। यदि आप नया घर खरीदना चाहते हैं, वाहन लेना चाहते हैं या बच्चों का ‘यज्ञोपवीत’ अथवा ‘विद्यारंभ’ संस्कार करना चाहते हैं, तो इस दिन का हर क्षण मंगलकारी है।

​पूजा की संक्षिप्त विधि और पीला रंग

​वसंत पंचमी के दिन पीले रंग का विशेष महत्व है। पीला रंग ऊर्जा, सात्विकता और खुशहाली का प्रतीक है।

  1. ​स्नान और संकल्प: प्रातः काल उठकर पीले वस्त्र धारण करें और मां सरस्वती की पूजा का संकल्प लें।
  2. ​स्थापना: चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें। साथ ही अपनी पुस्तकें, कलम या संगीत वाद्ययंत्र भी वहां रखें।
  3. ​अर्पण: मां को पीले फूल (गेंदा या सरसों), पीला चंदन, और पीले वस्त्र अर्पित करें।
  4. ​भोग: मां सरस्वती को केसरिया भात, बूंदी के लड्डू या पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
  5. ​मंत्र जाप: ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
​विद्यार्थियों के लिए विशेष सुझाव

​इस महासंयोग वाले दिन छात्रों को अपनी पढ़ाई की मेज (Study Table) उत्तर-पूर्व दिशा में रखनी चाहिए। पूजा के बाद अपनी सबसे प्रिय पुस्तक के पहले पन्ने पर रोली या हल्दी से ‘श्री’ लिखें। मान्यता है कि इससे एकाग्रता बढ़ती है और देवी सरस्वती की कृपा सदैव बनी रहती है।

Kamlesh Thakur

कमलेश ठाकुर पिछले 3 वर्षों से हिमालयन डॉन मीडिया के साथ बतौर पत्रकार कार्यरत हैं। उन्हें हिमाचल प्रदेश की स्थानीय खबरों, शिक्षा, प्रशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों की गहरी समझ है। सटीक, विश्वसनीय और तथ्यपरक रिपोर्टिंग उनकी पहचान है। स्थानीय घटनाओं को पाठकों तक सरल और प्रभावी ढंग से पहुंचाने में उनकी विशेष रुचि है।

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