34वें नंबर से नंबर-1 तक पहुंचा हिमाचल! ERSS-112 में देशभर में टॉप, 4 मिनट 4 सेकंड रहा रिस्पॉन्स टाइम

On: October 1, 2026 2:34 PM
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हिमाचल पुलिस ERSS-112 रैंकिंग में देश में नंबर-1
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सितंबर 2026 की रैंकिंग में 4 मिनट 4 सेकंड रहा औसत प्रतिक्रिया समय, नवंबर 2025 के 34वें स्थान से तय किया नंबर-1 तक का सफर

शिमला। आपात स्थिति में पुलिस कितनी जल्दी मौके पर पहुंचती है, यह किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा और भरोसे से सीधे जुड़ा विषय है। इसी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने उल्लेखनीय प्रदर्शन दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार सितंबर 2026 की ERSS-112 राष्ट्रीय रैंकिंग में हिमाचल प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा है। 112 नंबर पर प्राप्त आपात कॉल के मामले में हिमाचल पुलिस का औसत प्रतिक्रिया समय 4 मिनट 4 सेकंड दर्ज किया गया।

यानी आपात स्थिति की सूचना मिलने के बाद कॉल को संबंधित टीम तक पहुंचाने, पुलिस वाहन को रवाना करने और मौके पर सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में औसतन करीब चार मिनट का समय लगा। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश में यह प्रदर्शन आपातकालीन पुलिस व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

34वें स्थान से नंबर-1 तक पहुंचा हिमाचल

हिमाचल पुलिस की इस उपलब्धि की खास बात यह है कि राज्य ने अपेक्षाकृत कम समय में अपनी राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ा सुधार किया है। नवंबर 2025 में हिमाचल प्रदेश ERSS-112 की राष्ट्रीय रैंकिंग में 34वें स्थान पर था। इसके बाद पुलिस की आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था में लगातार सुधार किया गया और फरवरी 2026 में राज्य दूसरे स्थान तक पहुंच गया। अब सितंबर 2026 की रैंकिंग में हिमाचल ने पहला स्थान हासिल किया है।

यह बदलाव बताता है कि आपात कॉल की पूरी प्रक्रिया में तकनीकी व्यवस्था, कॉल डिस्पैच, वाहन तैनाती और फील्ड पुलिस के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

112 पर एक कॉल और सक्रिय हो जाती है पूरी व्यवस्था

ERSS-112 देश की एकीकृत आपातकालीन सेवा है। किसी व्यक्ति को पुलिस की तत्काल सहायता की आवश्यकता होने पर वह 112 पर संपर्क कर सकता है। कॉल प्राप्त होने के बाद उसकी जानकारी संबंधित पुलिस इकाई तक पहुंचाई जाती है और आवश्यकता के अनुसार मौके पर पुलिस वाहन एवं कर्मचारियों को रवाना किया जाता है।

इस प्रक्रिया में केवल मौके पर पहुंचने वाली पुलिस टीम ही नहीं, बल्कि कॉल रिसीव करने वाले कर्मचारी, डिस्पैच सिस्टम से जुड़े कर्मचारी, वाहन में तैनात पुलिस जवान और जिला स्तर की पुलिस टीम एक साथ काम करती है। ऐसे में प्रतिक्रिया समय कम करने के लिए हर स्तर पर तालमेल महत्वपूर्ण होता है।

तकनीक और बेहतर समन्वय से कम हुआ रिस्पॉन्स टाइम

हिमाचल पुलिस के अनुसार ERSS-112 से जुड़े कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है। आपात कॉल को तेजी से प्रोसेस करने, संबंधित टीम तक सूचना पहुंचाने और उपलब्ध संसाधनों की बेहतर तैनाती पर लगातार काम किया गया है।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में पुलिस के सामने मैदानी राज्यों की तुलना में अलग चुनौतियां रहती हैं। दूरदराज के गांव, घुमावदार सड़कें, लंबी दूरी, भूस्खलन और खराब मौसम कई बार आपात स्थिति में मौके तक पहुंचने का समय प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में कम औसत प्रतिक्रिया समय हासिल करना पुलिस की आपातकालीन व्यवस्था की कार्यक्षमता के लिए महत्वपूर्ण संकेतक है।

डीजीपी अशोक तेवारी ने टीम को दी बधाई

हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीजीपी अशोक तेवारी ने ERSS-112 से जुड़ी पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। पुलिस के अनुसार उन्होंने कहा कि 34वें स्थान से देश में नंबर-1 तक पहुंचना पुलिस कर्मचारियों की मेहनत और टीमवर्क का परिणाम है।

उन्होंने आपात स्थिति में प्रत्येक मिनट के महत्व पर जोर देते हुए प्रदर्शन को आगे भी बनाए रखने की आवश्यकता बताई। हिमाचल पुलिस की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर रैंकिंग हासिल करने के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता और त्वरित प्रतिक्रिया को लगातार मजबूत करना प्राथमिकता है।

अब चुनौती प्रदर्शन को लगातार बनाए रखने की

राष्ट्रीय रैंकिंग में पहला स्थान हासिल करना एक उपलब्धि है, लेकिन आपातकालीन सेवाओं के मामले में असली कसौटी लगातार तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया है। हिमाचल में भौगोलिक परिस्थितियां हर जिले और क्षेत्र में अलग हैं। ऐसे में ERSS-112 की व्यवस्था को और मजबूत करना, दूरदराज क्षेत्रों तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना और तकनीक व फील्ड पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना आगे भी महत्वपूर्ण रहेगा।

आम नागरिक के लिए 112 सेवा की उपयोगिता इसी बात में है कि संकट के समय उसकी कॉल केवल दर्ज न हो, बल्कि कम से कम संभव समय में सही पुलिस टीम तक पहुंचे और जरूरत के अनुसार मौके पर सहायता उपलब्ध हो।

हिमालयन डॉन | नई भोर, नई खबर

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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