शिमला | हिमाचल प्रदेश में अब स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पाना न केवल आसान होगा, बल्कि पूरी तरह पारदर्शी भी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ‘सहारा’ और ‘हिमकेयर’ योजनाओं की समीक्षा करते हुए सिस्टम को ‘स्मार्ट और हाई-टेक’ बनाने का ब्लूप्रिंट तैयार किया है।
🔍 सहारा योजना: अब असली हकदार को मिलेगा हक
सरकार ने साफ कर दिया है कि सहायता केवल उन्हें मिलेगी जिन्हें वाकई ज़रूरत है।
- लोकल ऑडिट: अब जमीनी स्तर पर जांच होगी कि पैसा सही जगह जा रहा है या नहीं।
- 3-सदस्यीय कमेटी: जिला स्तर पर कमेटी हर लाभार्थी का दोबारा सत्यापन (Verification) करेगी।
- वन पोर्टल: अब सहारा के लाभार्थी भी ‘हिम परिवार’ पोर्टल का हिस्सा होंगे।
📸 हिमकेयर: चेहरा दिखाओ, इलाज पाओ!
फर्जीवाड़े को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने तकनीक का सहारा लिया है:
- Face Recognition: अब रजिस्ट्रेशन के लिए अंगूठा लगाने की ज़रूरत नहीं, चेहरे की पहचान से काम होगा।
- सरकारी अस्पतालों में VIP सुविधा: अब हिमकेयर कार्ड धारक सरकारी अस्पतालों के प्राइवेट वार्ड में भी इलाज करा सकेंगे।
- पेंडिंग पेमेंट: प्राइवेट अस्पतालों को राहत देते हुए उनके बकाया भुगतान के निर्देश जारी।
🚀 हिमाचल की ‘हेल्थ-टेक’ क्रांति
मुख्यमंत्री ने हिमाचल को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई आधुनिक सुविधाओं का जिक्र किया:
- रोबोटिक सर्जरी और पैट स्कैन: अब बड़े शहरों की दौड़ लगाने की ज़रूरत नहीं।
- रोगी मित्र योजना: अस्पतालों में मरीजों की मदद के लिए ‘मित्र’ तैनात होंगे।
- 70 आदर्श संस्थान: गांव-गांव तक पहुँचेगी आधुनिक चिकित्सा।
💡 खास बात: डेटा से बनेगी रणनीति
अब हिमकेयर के डेटा का इस्तेमाल यह समझने में होगा कि प्रदेश के किस इलाके में कौन सी बीमारी ज्यादा फैल रही है, ताकि सरकार वहां पहले से बेहतर इंतजाम कर सके।
Read more: मुख्यमंत्री सुक्खू का ‘मिशन हेल्थ’; सहारा और हिमकेयर में अब ‘सिस्टम’ भी होगा स्वस्थ!“हमारा लक्ष्य सिर्फ इलाज करना नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए स्वास्थ्य व्यवस्था को आम आदमी के लिए पारदर्शी बनाना है।” — ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू







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