हिमाचल: 13 साल की सेवाएं और अब रोजगार पर संकट; श्रम विभाग के 160 आउटसोर्स कर्मियों का भविष्य दांव पर

On: October 1, 2026 12:21 PM
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हिमाचल में 160 आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटरों पर रोजगार संकट
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हिमाचल प्रदेश के श्रम एवं रोजगार विभाग में अपनी जिंदगी के 13 अहम साल देने वाले करीब 160 आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटर आज अपने भविष्य को लेकर गहरे खौफ में हैं। 30 सितंबर को इनका सेवाकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन विडंबना यह है कि विभाग की तरफ से इन्हें न तो काम जारी रखने का कोई लिखित आदेश मिला है और न ही काम से निकालने का। 1 अक्टूबर से इन कर्मचारियों के सामने यह यक्ष प्रश्न खड़ा है कि वे दफ्तर जाएं या नहीं।

बिना लिखित आदेश के ‘बाहर’ का रास्ता?

मिली जानकारी के अनुसार, विभागीय स्तर पर जिला रोजगार अधिकारियों को इन कर्मचारियों के संबंध में केवल मौखिक निर्देश दिए गए हैं। आधिकारिक तौर पर कोई लिखित छंटनी आदेश जारी न होने से कर्मचारियों में भारी असमंजस है। पिछले एक दशक से अधिक समय से जो हाथ विभाग का डाटा और कामकाज संभाल रहे थे, आज वे खाली नजर आ रहे हैं। रातों-रात पैदा हुई इस अनिश्चितता ने कर्मचारियों की रातों की नींद उड़ा दी है।

क्या कह रहा है विभाग? फाइलों में अटका भविष्य

विभागीय सूत्रों का तर्क है कि जिन विशिष्ट योजनाओं और प्रोजेक्ट्स के लिए इन डाटा एंट्री ऑपरेटरों को आउटसोर्स पर रखा गया था, उनके स्वरूप में अब बदलाव आ चुका है। हालांकि, इन 160 कर्मचारियों को पूरी तरह से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा या इन्हें सेवा विस्तार मिलेगा, इस पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। फिलहाल सेवा विस्तार की फाइल उच्च स्तर पर विचाराधीन है। जब तक सरकार या उच्चाधिकारियों की तरफ से हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक इन कर्मचारियों की वापसी संभव नहीं दिख रही।

परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट, सरकार से आस

आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने इस अचानक आए संकट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। महासंघ का स्पष्ट कहना है कि जिन युवाओं ने अपने जीवन के 13 बहुमूल्य वर्ष सरकारी तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में लगा दिए, उन्हें इस तरह अचानक अधर में छोड़ना न्यायसंगत नहीं है। इन नौकरियों पर 160 परिवार पल रहे हैं और सेवा विस्तार न मिलने पर इनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।

अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और श्रम विभाग के शीर्ष अधिकारियों पर टिकी हैं। फैसला अगर पक्ष में आता है, तो इन 160 परिवारों की दीवाली रोशन होगी; अन्यथा, 13 साल की वफादारी के बदले इन्हें बेरोजगारी का अंधेरा ही नसीब होगा।

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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