बस स्टैंड के पास फोरलेन बना परेशानी का सबब, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल; वर्षों से उठ रही मांग के बावजूद समाधान नहीं
सोलन। शहर के बाईपास पर बस स्टैंड के समीप फोरलेन पर फुटओवर ब्रिज का अभाव अब लोगों के लिए परेशानी के साथ-साथ सुरक्षा का गंभीर सवाल बन गया है। फोरलेन के बीच रेलिंग लगाए जाने के बाद सड़क के दूसरी ओर जाने के लिए लोगों को करीब 100 मीटर तक घूमकर जाना पड़ रहा है। रोजमर्रा की आवाजाही में यह दूरी लोगों के लिए मुश्किल पैदा कर रही है और जल्दबाजी में कई लोग रेलिंग के नीचे से जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने को मजबूर हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए बनी हुई है। तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही वाले फोरलेन पर रेलिंग के नीचे से निकलकर सड़क पार करना कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। सवाल यह है कि जब इस स्थान पर लोगों की नियमित आवाजाही है तो उन्हें सुरक्षित तरीके से सड़क पार करने की सुविधा आखिर कब मिलेगी?
100 मीटर घूमकर जाना पड़ रहा, मजबूरी में जोखिम उठा रहे लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड के आसपास रोजाना बड़ी संख्या में लोग सड़क के दोनों ओर आते-जाते हैं। फोरलेन के बीच रेलिंग लगाए जाने के बाद निर्धारित रास्ते से दूसरी ओर जाने के लिए करीब 100 मीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
कई बार जल्दबाजी या समय की कमी के कारण लोग रेलिंग के नीचे से निकलकर सड़क पार कर लेते हैं। यह स्थिति किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। लोगों का कहना है कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि लोगों को नियम तोड़कर अपनी जान जोखिम में डालने की मजबूरी ही न हो।
कई वर्षों से उठ रही फुटओवर ब्रिज की मांग
स्थानीय वार्ड पार्षद की ओर से भी इस स्थान पर फुटओवर ब्रिज बनाने की मांग कई वर्षों से उठाई जा रही है। नगर निगम की ओर से भी लोगों को फुटओवर ब्रिज की सुविधा उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में धरातल पर समाधान नजर नहीं आया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में विकास कार्यों के साथ-साथ पैदल चलने वाले लोगों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फोरलेन पर वाहनों की बढ़ती रफ्तार के बीच पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था बेहद जरूरी है।
एनएचएआई से बातचीत, प्रशासन को भी भेजा पत्र : महापौर
नगर निगम सोलन की महापौर सुषमा शर्मा ने बताया कि फुटओवर ब्रिज को लेकर नगर निगम की ओर से एनएचएआई से बातचीत की जा रही है। इस संबंध में प्रशासन को भी पत्र भेजा गया है। वहीं वार्ड पार्षद ने भी इस मुद्दे को उपायुक्त के समक्ष रखा है।
महापौर ने कहा कि फुटओवर ब्रिज की मंजूरी मिलने के बाद इसके निर्माण का काम शुरू किया जाएगा, जिससे लोगों को राहत मिल सकेगी।
हादसे का इंतजार क्यों?
बस स्टैंड जैसे व्यस्त क्षेत्र में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की सुविधा होना जरूरी है। यदि लोग रोजाना रेलिंग के नीचे से निकलकर फोरलेन पार करने को मजबूर हैं, तो यह केवल यातायात व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनसुरक्षा से जुड़ा विषय है।
प्रशासन, नगर निगम और एनएचएआई को इस मामले में आपसी समन्वय से जल्द समाधान निकालना चाहिए। फुटओवर ब्रिज बनने तक लोगों के लिए सुरक्षित अस्थायी क्रॉसिंग की व्यवस्था की जा सकती है या नहीं, इस पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।
किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था करना ही जिम्मेदार प्रशासन की पहचान है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि वर्षों से चली आ रही इस मांग पर कागजी कार्रवाई कब खत्म होगी और फुटओवर ब्रिज का काम धरातल पर कब शुरू होगा।












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