बिना रसायनों के लहलहाएंगे बाग: सोलन KVK में 12 जनवरी से शुरू होगा विशेष प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण

On: January 11, 2026 9:41 AM
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बिना रसायनों के लहलहाएंगे बाग
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सोलन। हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश के किसान अब रसायनों के बोझ को छोड़कर शुद्ध और मुनाफे वाली खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अंतर्गत आने वाले कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) सोलन में आगामी 12 जनवरी से एक विशेष पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बागवानों को बिना किसी जहरीले रसायन के फल उगाने के गुर सिखाना है।

मॉडल बगीचों से सीखेंगे सफलता के मंत्र
KVK सोलन ने अपने परिसर में प्राकृतिक खेती के चार शानदार प्रदर्शन मॉडल (Demonstration Plots) तैयार किए हैं। पिछले चार वर्षों के कड़े अनुसंधान के बाद यहाँ सेब, कीवी, आडू और प्लम के बगीचे प्राकृतिक विधि से सफलतापूर्वक विकसित किए गए हैं। प्रशिक्षण के दौरान बागवानों को इन बगीचों का भ्रमण कराया जाएगा ताकि वे देख सकें कि कैसे रसायनों के बिना भी बेहतर उत्पादन संभव है।
इन तकनीकों पर रहेगा मुख्य जोर:

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा कुछ खास जैविक और प्राकृतिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, जो जमीन की उर्वरता बढ़ाने में सहायक हैं:

खाली जगह से कमाएं ‘एक्स्ट्रा’ मुनाफा

इस खबर की सबसे खास बात यह है कि विशेषज्ञों ने बगीचों के बीच खाली पड़ी जमीन का सदुपयोग करने का तरीका भी खोज निकाला है। बागवानों को सलाह दी जा रही है कि वे फलदार पौधों के बीच मटर, धनिया, मेथी और जौ जैसी नकदी फसलें उगाएं। ये फसलें न केवल अतिरिक्त आय देंगी, बल्कि प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन फिक्स कर मिट्टी को उपजाऊ भी बनाएंगी।

विशेषज्ञ की राय: “प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हमने सेब और कीवी जैसे फलों के सफल मॉडल तैयार किए हैं। 12 जनवरी से शुरू होने वाले इस शिविर में बागवानों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।” डॉ. अमित विक्रम, प्रभारी, KVK सोलन

Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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