कमलेश ठाकुर, सोलन: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बसों में रियायती सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। अब महिलाओं सहित पुलिस, प्रेस और दिव्यांग जैसी 28 विशेष श्रेणियों के यात्रियों को बस किराए में छूट का लाभ लेने के लिए ‘हिम बस कार्ड’ (Him Bus Card) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
31 जनवरी 2026 तक कार्ड न बनवाने की स्थिति में यात्रियों को बस में सफर के दौरान पूरा किराया चुकाना होगा। सरकार ने यह कदम बसों में फर्जीवाड़े को रोकने और यात्रियों को डिजिटल सुविधाएं देने के उद्देश्य से उठाया है।
प्रमुख जानकारी: एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अंतिम तिथि | 31 जनवरी |
| अनिवार्यता | महिलाओं सहित कुल 28 श्रेणियां |
| आवेदन शुल्क | ₹200 + GST (कुल ₹236) |
| रिन्यूअल शुल्क | ₹150 (एक वर्ष बाद) |
| होम डिलीवरी | ₹42 अतिरिक्त (डाक खर्च) |
बिना कार्ड नहीं मिलेगी 50% छूट
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में रोजाना करीब 2 लाख महिलाएं एचआरटीसी बसों में 50% छूट के साथ सफर करती हैं। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि 31 जनवरी के बाद किसी महिला यात्री के पास हिम बस कार्ड नहीं होगा, तो उन्हें इस छूट का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, कैंसर रोगी, दिव्यांग, पुलिस और प्रेस जैसे 17 निशुल्क श्रेणियों के लिए भी यह कार्ड पहचान और ट्रैकिंग के लिए जरूरी है।
कहां और कैसे करें अप्लाई?
यात्री इस कार्ड के लिए दो माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं:
- ऑनलाइन: ‘हिम एक्सेस’ (Him Access) पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरें।
- ऑफलाइन: एचआरटीसी के क्षेत्रीय कार्यालयों या बस अड्डों पर जाकर भी कार्ड बनवाया जा सकता है।
हिम बस कार्ड के विशेष लाभ
यह केवल एक पहचान पत्र नहीं है, बल्कि एक यूनिफाइड डिजिटल कार्ड है जिसके कई फायदे हैं:
- अतिरिक्त छूट: कार्ड से भुगतान करने पर सामान्य यात्रियों को भी किराए में 5% की छूट मिलेगी।
- कैशबैक ऑफर: 10,000 रुपये का सफर पूरा होने पर यात्रियों को 2,000 रुपये तक का कैशबैक मिलेगा।
- स्मार्ट पेमेंट: यह एटीएम कार्ड की तरह काम करता है, जिसे बस की मशीनों में स्वाइप कर किराया चुकाया जा सकता है।
- पारदर्शिता: कार्ड के माध्यम से एचआरटीसी को साल में करीब 12 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।
उपमुख्यमंत्री का बयान
हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि 31 जनवरी तक सभी लाभार्थियों को कार्ड बनवाने का लक्ष्य दिया गया है। इससे रिकॉर्ड ट्रैक करने में आसानी होगी कि किस यात्री ने साल भर में कितना सफर किया है और सिस्टम में पारदर्शिता आएगी।
