सोलन | न्यूज़ डेस्क हिमाचल प्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर (Cold Wave) ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रदेश के 12 में से 8 जिलों में तापमान शून्य (0°C) से नीचे गिर गया है। घने कोहरे और पाले (Frost) की दोहरी मार से सबसे ज्यादा प्रभावित सोलन और सिरमौर जिले हो रहे हैं, जहां सड़कों पर जमी बर्फ की पतली परत हादसों का सबब बन रही है।
सोलन: माइनस में पहुंचा पारा, जमने लगा पानी
औद्योगिक नगरी सोलन में ठंड ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, सोलन का न्यूनतम तापमान -0.5°C तक लुढ़क गया है।
- बद्दी और नालागढ़: मैदानी इलाकों से सटे होने के कारण यहां सुबह के समय विजिबिलिटी (दृश्यता) मात्र 20 से 50 मीटर रह गई है।
- पेयजल संकट: कड़ाके की ठंड के कारण रात के समय पाइपों में पानी जमने लगा है, जिससे सुबह के समय लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
सिरमौर: हरिपुरधार और नाहन में ‘येलो अलर्ट’
सिरमौर जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों, विशेषकर हरिपुरधार और नौहराधार में बर्फीली हवाओं का प्रकोप जारी है।
- सड़क हादसे: कोहरे और फिसलन की वजह से जिले में सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। ऊना के पास हुए ताजा हादसे में भी कोहरे को मुख्य वजह माना जा रहा है।
- मैदानी इलाकों में धुंध: पांवटा साहिब और नाहन के निचले क्षेत्रों में दोपहर तक कोहरा नहीं छंट रहा है, जिससे दिल्ली और चंडीगढ़ जाने वाली बसें देरी से चल रही हैं।
हिमाचल में कहां कितनी ठंड? (न्यूनतम तापमान)
मौसम केंद्र शिमला द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के प्रमुख शहरों का तापमान इस प्रकार है:
| शहर/स्थान | न्यूनतम तापमान (°C) |
|---|---|
| कुकुमसेरी | -10.9 |
| ताबो (स्पीति) | -7.9 |
| कलपा | -3.6 |
| सोलन | -0.5 |
| सुंदरनगर | -0.2 |
| शिमला | 1.1 |
बारिश की कमी ने बढ़ाई मुसीबत
इस साल जनवरी महीने में अब तक 85% कम बारिश दर्ज की गई है। सूखी ठंड (Dry Cold) के कारण सर्दी-जुकाम और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सोलन और सिरमौर के किसानों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि बारिश न होने से रबी की फसलों पर संकट मंडरा रहा है।
पर्यटकों और वाहन चालकों के लिए जरूरी गाइडलाइन
अगर आप सोलन या सिरमौर की ओर यात्रा कर रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- फॉग लाइट का प्रयोग: सुबह 10 बजे तक और शाम 5 बजे के बाद लाइट ऑन रखें।
- ब्लैक आइस (Black Ice): छाया वाले क्षेत्रों में सड़क पर पाला जमा होता है जो कांच की तरह दिखता है, वहां ब्रेक लगाने से बचें।
- गर्म पेय पदार्थ: पहाड़ी क्षेत्रों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए गुनगुने पानी का सेवन करें।
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