कांगड़ा घाटी रेल के अस्तित्व को बचाने की गुहार; PMO और रेल मंत्री को सौंपा ज्ञापन

On: April 13, 2026 4:01 PM
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दीपक भारद्वाज कांगड़ा घाटी रेल संघर्ष समिति का ज्ञापन दिल्ली में दिखाते हुए
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काँगड़ा। हिमालयन डॉन, हिमाचल प्रदेश की जीवनरेखा और ऐतिहासिक धरोहर मानी जाने वाली कांगड़ा घाटी रेल लाइन को संरक्षित करने और इसके सुदृढ़ीकरण की मांग अब देश की राजधानी के गलियारों तक पहुँच गई है। सोमवार को कांगड़ा घाटी रेल संघर्ष समिति के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और रेल मंत्री कार्यालय में अपनी मांगों से संबंधित औपचारिक ज्ञापन सौंपा।

​धरोहर को बचाने की मुहिम

​यह मांग पत्र नॉर्दर्न रेलवे की रेलवे परामर्श कमेटी के सदस्य और संघर्ष समिति के प्रमुख चेहरा दीपक भारद्वाज द्वारा जमा करवाया गया। इस अवसर पर भारद्वाज ने कहा कि समिति का एकमात्र लक्ष्य इस ऐतिहासिक रेल मार्ग को उजड़ने से बचाना और इसे आधुनिक सुविधाओं के साथ सुदृढ़ करना है।

“रेलवे परामर्श कमेटी का सदस्य बनते ही चक्की पुल और कांगड़ा रेल मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रहे हैं। हमने न केवल प्रशासनिक स्तर पर इस बात को रखा है, बल्कि सांसदों के माध्यम से लोकसभा में भी इस मुद्दे को उठाने का प्रयास किया है।” — दीपक भारद्वाज, सदस्य (रेलवे परामर्श कमेटी)

​समिति द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:

​संरक्षण: ब्रिटिश काल की इस ऐतिहासिक रेल लाइन को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सहेजना।

​सुदृढ़ीकरण: चक्की पुल सहित अन्य तकनीकी बाधाओं का स्थायी समाधान कर रेल सेवा को सुचारू बनाना।

दीपक भारद्वाज ने बताया कि कांगड़ा संघर्ष समिति ने जमीनी स्तर पर इस मुद्दे को मजबूती से उठाकर भारी जनसमर्थन जुटाया है। उन्होंने प्रदेश की जनता और मीडिया जगत से आग्रह किया कि वे इस निस्वार्थ मुहिम का हिस्सा बनें ताकि केंद्र सरकार तक हिमाचल की आवाज प्रभावी रूप से पहुँच सके।

​समिति को पूर्ण विश्वास है कि केंद्र सरकार इस विषय की गंभीरता और हिमाचल की भावनाओं को समझते हुए जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय लेगी। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक कांगड़ा रेल का भविष्य सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक उनका यह संगठित प्रयास और आंदोलन जारी रहेगा।

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Akshay Chauhan

अक्षय चौहान पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता एवं मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे साप्ताहिक हिमालयन डॉन के संपादकीय एवं प्रबंधन कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। समाचार संकलन, संपादन, डिजिटल मीडिया, कंटेंट प्रबंधन तथा समाचार पत्र के संचालन में उनका व्यापक अनुभव रहा है।

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