मंडी: हिमालयन डॉन, उत्तर भारत की सबसे महत्त्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शुमार पठानकोट-मंडी फोरलेन फिलहाल प्रशासनिक सुस्ती और अनिश्चितता के भंवर में फंसी नजर आ रही है। जहाँ एक तरफ पठानकोट से परौर और पधर से मंडी तक का निर्माण कार्य गति पकड़ रहा है, वहीं परौर से पधर के बीच का खंड पिछले चार वर्षों से एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाया है।
इस देरी ने न केवल परियोजना की लागत को आसमान पर पहुंचा दिया है, बल्कि स्थानीय जनता को गहरे मानसिक और आर्थिक संकट में डाल दिया है।
सामरिक महत्त्व पर भारी प्रशासनिक सुस्ती
हिमाचल प्रदेश और सीमावर्ती राज्यों को जोड़ने वाली यह सड़क सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। लेह-लद्दाख और सीमावर्ती क्षेत्रों तक भारतीय सेना की त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए इस फोरलेन का निर्माण अनिवार्य है। इसके बावजूद, परौर से पधर खंड के लिए:
- न तो अभी तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हुई है।
- न ही भूमि अधिग्रहण की कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।
- सर्वेक्षण का कार्य भी अधर में लटका हुआ है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि तीन साल की देरी के कारण निर्माण सामग्री और श्रम की लागत में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिससे सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।
विकास की राह में ‘असमंजस’ का रोड़ा
सबसे दुखद पहलू स्थानीय जनता की स्थिति है। परौर से लेकर पधर तक के हजारों ग्रामीण और किसान पिछले कई वर्षों से ‘मेंटल ट्रॉमा’ के दौर से गुजर रहे हैं। मार्ग की दिशा और दायरे को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है, जिसके कारण:
- निर्माण कार्य ठप: लोग अपने पुराने मकानों की मरम्मत या नए मकानों का निर्माण नहीं कर पा रहे हैं।
- कृषि व निवेश पर रोक: किसान अपनी उपजाऊ भूमि पर बागवानी या अन्य दीर्घकालिक निवेश करने से डर रहे हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि उनकी जमीन कब और कितनी अधिग्रहित कर ली जाएगी।
- आर्थिक मंदी: इस अनिश्चितता ने पूरे क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधियों की रफ्तार को धीमा कर दिया है।
- परियोजना की दिशा और सीमा को लेकर पारदर्शिता बरती जाए।
- भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की दरों पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
- लंबित प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं को दूर कर कार्य में तेजी लाई जाए।
“हम न तो घर बना पा रहे हैं और न ही खेत में कोई नया काम शुरू कर पा रहे हैं। सरकार को कम से कम स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि हम अपने भविष्य का फैसला कर सकें।” — सतीश शर्मा स्थानीय निवासी
केंद्र से हस्तक्षेप की गुहार
हिमालयन डॉन के माध्यम से क्षेत्र की जनता ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि उच्च स्तर पर समन्वय की कमी के कारण यह खंड पिछड़ रहा है। जनता की मांग है कि:
- परियोजना की दिशा और सीमा को लेकर पारदर्शिता बरती जाए।
- भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की दरों पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
- लंबित प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं को दूर कर कार्य में तेजी लाई जाए।
हिमाचल की जनता को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय का संज्ञान लेकर परौर-पधर खंड को नई ऊर्जा देगी, ताकि वर्षों का इंतजार जल्द ही सुगम और सुरक्षित सफर में बदल सके।
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रतन चंद जी नमस्कार🙏 'हिमालयन डान' के नए स्वरूप को सराहने और अपनी आत्मीय शुभकामनाएं भेजने के लिए हम आपका…