हिमाचल में पंचायत चुनाव की हलचल तेज

हिमाचल में पंचायत चुनाव की हलचल तेज, 28 फरवरी तक पूरी होंगी सभी औपचारिकताएं

Himachal

शिमला। हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र की सबसे छोटी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई, पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की रणभेरी बजने वाली है। राज्य चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनाव की तैयारियों में अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। प्रदेश राज्य चुनाव आयुक्त अनिल खाची ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि चुनाव से संबंधित सभी औपचारिकताओं को 28 फरवरी, 2026 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए।

हाईकोर्ट के आदेशों का पालन अनिवार्य

राज्य सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के प्रकाशन और आरक्षण रोस्टर को लेकर माननीय उच्च न्यायालय ने 28 फरवरी तक की समय सीमा निर्धारित की है। चुनाव आयोग इस डेडलाइन का कड़ाई से पालन करने जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप ही सभी कार्य सुनिश्चित किए जाएं ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कानूनी बाधा उत्पन्न न हो।

चुनाव आयोग की तीन मुख्य प्राथमिकताएं

बैठक के दौरान आयुक्त अनिल खाची ने तीन प्रमुख कार्यों को ‘टॉप प्रायोरिटी’ पर रखने को कहा है:

  1. सटीक मतदाता सूची का प्रकाशन: हर पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो।
  2. वोटर लिस्ट की समयबद्ध प्रिंटिंग: छपाई के कार्य में तेजी लाकर इसे निर्धारित समय में ब्लॉक और जिला स्तर तक पहुँचाना।
  3. आरक्षण रोस्टर का निर्धारण: वार्डों और पंचायतों के आरक्षण की स्थिति को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करना।

इन तीनों प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद ही प्रदेश में चुनाव के वास्तविक कार्यक्रम (Election Schedule) की घोषणा की जाएगी।

क्या पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ होंगे?

हिमाचल की राजनीति और प्रशासन में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है। खबरों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में प्रदेश के कई शहरी निकायों (ULBs) का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। ऐसे में राज्य चुनाव आयोग संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और समय की बचत के लिए पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव एक साथ (Simultaneous Elections) करवाने पर विचार कर रहा है।

नई पंचायतों का गठन और प्रशासनिक हलचल

बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने चुनाव आयुक्त को जानकारी दी कि वर्तमान में नई पंचायतों के गठन और सीमांकन की प्रक्रिया जारी है। इसे भी समयसीमा के भीतर पूरा करने का आश्वासन दिया गया है। बैठक में प्रधान सचिव (शहरी विकास एवं वित्त) देवेश कुमार, निदेशक राजस्व डी.सी. राणा सहित पर्यटन, आबकारी, और सांख्यिकी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी विभागों को आपसी समन्वय (Inter-departmental Coordination) के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

आम जनता पर क्या होगा असर?

चुनाव की तैयारियों के चलते ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि एक बार चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होने के बाद नई घोषणाएं नहीं की जा सकेंगी। उम्मीदवारों ने भी अब अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा दी है। आरक्षण रोस्टर पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि कौन सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी।

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